उम्मीदें हैं खूब, उद्योगों के साथ रियल इस्टेट में मिलेगा काम

जबलपुर में प्रवासी मजदूरों के लिए बढ़ी संभावनाएं

By: shyam bihari

Published: 14 Jun 2020, 10:43 PM IST

जबलपुर। बाहर से आए प्रवासी मजदूरों के लिए रियल इस्टेट में भी रोजगार की सम्भावनाएं बढ़ गई हैं। भवन निर्माण क्षेत्र में बड़ी तादाद में मजदूर शहर को छोड़कर अपने जिलों में चले गए हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण से उपजे संकट के बीच उन्होंने यह कदम उठाया था। ऐसे में उनकी जगह खाली हो गई है। अब उनकी जगह देश के अलग-अलग प्रदेशों के शहरों से आए प्रवासी श्रमिकों को मिल सकती है। इस करोबार से जुड़े बिल्डर्स और डेवलपर्स भी इसमें आगे आ रहे हैं। जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 80 से अधिक छोटे एवं बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट चल रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार इन प्रोजेक्ट में 8 से 10 हजार मजदूरों को काम मिला हुआ है। जबलपुर के आसपास के जिलों के ज्यादातर मजदूर मकानों को तैयार करने में सहायता करते हैं। लेकिन कोरोना की वजह से 60 से 70 फीसदी मजूदर यहां से चले गए। उनमें से कुछ तो वापस आ गए हैं, लेकिन ज्यादातर अभी डरे-सहमे हैं। इसलिए यह जगह खाली हो सकती है।

ठेकेदारों के पास श्रमिकों की कमी बनी हुई है। कुछ दिनों पहले रियल इस्टेट में भी सरकार ने काम शुरू करने की अनुमति दे दी थी। तो ऐसे में जिनके अधूरे प्रोजेक्ट हैं उनका बाहरी काम तेज बारिश के पहले करने की जद्दो जहद की जा रही है। इनमें से कुछ प्रोजेक्ट ऐसे हैं जो कि पूर्णता की ओर थे, लेकिन लॉकडाउन लगने के कारण काम बीच में छूट गया। इसमें उन प्रवासी श्रमिकों को अवसर ज्यादा मिल सकता है जो कि अकुशल हैं। जिले में प्रवासी श्रमिकों के साथ ही नियोक्ताओं का पंजीयन लगभग पूरा हो चुका है। ऐसे में अब मुख्य काम श्रमिकों को रेाजगार दिलाना है। उसके लिए अब विभाग, ठेकेदार, बिल्डर्स व अन्य प्रतिष्ठानों से सीधा संपर्क किया जा रहा है। ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इन श्रमिकों को रोजगार मिल सके।

shyam bihari Desk
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