बस्तर के स्कूली बच्चे बोल फर्राटेदार ये तेलुगू, बंगला, ओडिया भाषा, जानिए इसी से कैसे हो रहा इनका बौद्धिक विकास

बस्तर के स्कूली बच्चे बोल फर्राटेदार ये तेलुगू, बंगला, ओडिया भाषा, जानिए इसी से कैसे हो रहा इनका बौद्धिक विकास

Badal Dewangan | Publish: Jun, 15 2019 01:35:54 PM (IST) Jagdalpur, Jagdalpur, Chhattisgarh, India

प्राइमरी स्कूल (Premery School) के बच्चे गोंडी-हल्बी के साथ तेलगु (Telugu) व बांग्ला (Bangala) में भी कर रहे बात, सुकमा जिले के छिंदगढ़ प्राथमिक शाला में पढ़ाई के प्रति रुचि जगाने प्रयास

जगदलपुर. आयतू छिंदगढ़ में रहता है, स्कूल आने से पहले तक उसे गोंडी ही आती थी लेकिन अब उससेे जब बांग्ला में सवाल पूछा जाता है कि की खातछो तो वह जवाब देता है, आमी भात खातछी। इसी तरह स्कूल के दूसरे बच्चे भी बांग्ला और तेलगु में बात करते हैं। शासकीय प्राथमिक शाला छिंदगढ़ की शिक्षक चुमेश्वर काशी ने स्कूल में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने उन्हें अलग-अलग बोली-भाषा में पढ़ाना शुरू किया। इससे छात्रों में पढ़ाई को लेकर रुचि बढ़ती गई। इस प्रयोग की वजह से छात्रों की उपस्थिति में भी इजाफा हुआ। अब स्कूल में हर शनिवार को भाषा संगम क्लास लगाई जाती है। इसमें धुरवा, दोरला, संनथाली, हल्बी, गोंडी और माडी बोली के अलावा बांग्ला और तेलगु भाषा की भी जानकारी दी जा रही है। यहां के छात्र एक से अधिक भाषा और बोली में बात कर लेते हैं।

तीन शिक्षक एससीईआरटी की मॉडल टीचर बुक में शामिल
छिंदगढ़ की शिक्षिक चुमेश्वर काशी की तरह ही बस्तर संभाग के शिक्षक लीक से हटकर काम कर रहे हैं, जिसकी वजह से वे प्रदेश में बाकी शिक्षकों के लिए मॉडल बन गए। वहीं तीन शिक्षकों केे कार्य को एससीईआरटी ने मॉडल टीचर्स बुक में जगह दी है। इन सभी शिक्षकों के कार्यो को अब प्रदेश के अन्य स्कूलों में बतौर मॉडल के रूप में डेवलप कर और दूसरे शिक्षकों को प्रेरित करने का काम किया जाएगा। इसमें इसमें कोंडागांव मडानार के शिक्षक शिवचरण साहू, सुकमा छिंदगढ़ के चुमेश्वर काशी और बस्तर धरमाउर की रीना दत्ता शामिल हैं।

लाइव मॉडल बनाकर रोचक तरीके से पढ़ा रहीं छात्रों को
शासकीय पूर्व माध्यमिक स्कूल धरमाउर बस्तर की रीना दत्ता बच्चों रोचक तरीके से पढ़ाने के लिए कबाड़ से मॉडल बनाकर उन्हेें लाइव जानकारी दे रही है। पेन से थर्मामीटर तो फुटबॉल से ग्लोब बनाकर छात्रों को इसकी जानकारी दी जा रही है। स्कूल के छात्र-छात्राओं को खेल-खेल में सौर मंडल, चंद्र और सुर्य ग्रहण व मॉक ड्रील कर भूकंप से बचने की जानकारी भी रहें है। वहीं मॉडल बनाकर हाई कोट, सुप्रीम कोट, संसद भवन व अन्य भवनों के बारे में बताया जाता है, ताकि छात्र इन्हें जल्द से समझ सकें।

आत्मनिर्भर बनाने बनाया अखाड़ा, छात्रों ने हासिल किया मेडल
हाई स्कूल मडानार कोंडागांव के शिक्षक शिवचरण साहू स्कूल की छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने गर्मी की छुट्टियों में रोजाना सुबह एक से दो घंटे तक अखड़ा सीखाते थे। छात्राएं इसमें इतना परिपक्व हो गई हैं कि वे इसे खेल के रूप में सीखना शुरू कर दी। छात्राओं के साथ ही स्कूल के छात्र भी इस खेल में शामिल हुए। पिछले वर्ष मुंगेली में आयोजित राज्यस्तरीय अखाड़ा प्रतियोगिता में स्कूल के ३० छात्रों ने मेडल हासिल किया। अब यहां पर अखाड़ा सिखने वाले छात्रों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

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