आखिर क्यों डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में रात में सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई कर दी जाती है बंद

आखिर क्यों डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में रात में सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई कर दी जाती है बंद

Badal Dewangan | Updated: 20 Jul 2019, 01:08:59 PM (IST) Jagdalpur, Jagdalpur, Chhattisgarh, India

मेडिकल कॉलेज (Dimrapal medical collage) के मरीजों (Patients) को रात में नहीं मिल पा रहा सेंट्रल ऑक्सीजन (Central Oxygen) का फायदा, वर्कर (Staff) नहीं होने की वजह से रात में होती है दिक्कत

जगदलपुर. करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों को रात के वक्त सेंट्रल ऑक्सीजन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिसकी वजह प्रबंधन रात के लिए स्टाफ नहीं होना बता रहा है। ऐेसे में टेंपररी सिलेण्डर के जरिए मरीजों को ऑक्सीजन दिया जा रहा है।

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सिलेण्डर के जरिए ही मरीजों को ऑक्सीजन दिया जा रहा
ज्ञात हो कि गंभीर मरीजों को २४ घंटे आसानी से ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम को करोड़ों रुपए खर्च कर लगाया गया था। किन्तु इसके विपरीत मरीजों को रात के वक्त इसका लाभ नहीं मिल रहा है। उक्त मामले में मेकॉज अधीक्षक केएल आजाद ने चर्चा के दौरान बताया कि मेडिकल कॉलेज में सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सुबह 8 से 2 बजे और दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक ही दिया जाता है। इसके उपरांत ऑक्सीजन की सप्लाई करने स्टाफ नहीं है। ऐसे में ऑक्सीजन सिलेण्डर के जरिए ही मरीजों को ऑक्सीजन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा जल्द ही रात वक्त भी सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम को सुचारू रखने स्टाफ की कमी है। इस पर विचार किया जा रहा है, जैसे ही स्टाफ की कमी पूरी हो जाएगी। सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम का लाभ २४ घंटे मरीजों को मिल पाएगा।

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दूसरा सिलेण्डर लाने में समय लगता है
ज्ञात हो कि सेंट्रल ऑक्सीजन पाइप लाइन का विस्तार मेडिकल कॉलेज के ओटी, सर्जीकल वार्ड व अन्य वार्डों में किया गया है। इसकी मदद से सीधे मरीजो के बेड तक पाइप लाइन पहुंचाई गई। ताकि एमरजेंसी के दौरान तत्काल मास्क से मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराया जाए। सिलेण्डर में ऑक्सीजन खत्म होने की स्थिति में दूसरा सिलेण्डर लाने में समय लगता है। इस दौरान मरीज को तत्काल ऑक्सीजन उपलब्ध कराया जाना जरूरी होता है। इन परिस्थितियो को देखते हुए सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम की मेडिकल कॉलेज में स्थापना की गई थी। ताकि मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेण्डर के लिए दौड़ न लगाना पड़े।

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