नक्सलियों पर नकेल कसने बस्तर पुलिस रही कामयाब, लेकिन इन हादसो को रोकना होगी बड़ी चुनौती

नव वर्ष मिलन समारोह में बस्तर आईजी पी सुंदरराज ने की पत्रवार्ता, माओवाद और संभाग भर के सामान्य अपराधों की दी जानकारी

By: Badal Dewangan

Updated: 03 Jan 2020, 10:58 AM IST

जगदलपुर. जन मानस को बगैर नुकसान पहुंचाए माआवोद को जड़ से खत्म करने का प्रयास निरंतर जारी रहेगा। विगत वर्ष पुलिस माओवाद को पीछे ढक़ेलने में कामयाब रही, इस साल भी बस्तर को माओवाद से मुक्त करने की कोशिश जारी रहेंगी। उक्त बातें गुरुवार को लालबाग स्थित पुलिस कोआर्डिनेशन सेंटर में बस्तर आईजी पी सुंदरराज ने पत्रवार्ता में कही। इस दौरान सीआरपीएफ डीआईजी राजीव राय, कोबरा डीआईजी जंबुलकर, कांकेर डीआईजी संजीव शुक्ला, एसपी दीपक कुमार झा, सीआरपीएफ ८० बटालियन के अमिताभ, कांकेर के बीएसएफ, कोण्डागांव के आईटीबीपी, एसएसबी के अधिकारी भी मौजूद रहे।

नक्सल मामलों में मिल रही लगातार सफलता
नव वर्ष पर मिलन सम्मेलन में मीडिया से रुबरू होकर आईजी पी सुंदरराज ने संभाग भर में विगत वर्ष माओवाद और क्राइम का लेखा-जोखा सार्वजनिक किया। उन्होंने कहा पुलिस का सबसे पहला प्रयास होता है, कि जवानों की कम से कम कैज्यूल्टी हो और माओवादियों का सफाया किया जाए। विगत वर्षों से इस ओर लगातार पुलिस सफलता मिलती आ रही है। नक्सल वारदातों में ४० फीसदी , सुरक्षा बलों की शहादत भी ६५ फीसदी और नक्सल हिंसा में आम नागरिकों की मृत्यु में भी ४५ फीसदी कम हुई है। संभाग में जहां वर्ष २०१७-१८ में नक्सली वारदातों की संख्या ४५० से अधिक थी, विगत वर्ष २०१९ में २९५ तक सिमट कर रही गई। लगातार प्रभावित इलाकों में कैंप खुलने का असर माओवादियों की गतिविधियों पर पड़ रहा है। कंैप खुलने से इन क्षेत्रों में विकास के कार्य संभव हो पा रहे हैं। सडक़, पुल और भवनों का निर्माण किए गए हैं। इन क्षेत्रों में विकास और ग्रामीणों को जागरूक किए जाने से माओवादियों का दबदबा खत्म होने लगा है। इसलिए कुछ स्थानों में कैंप का विरोध करवाने जबरन ग्रामीणों को ढाल बनाकर माओवादी सामने ला रहे हैं, लेकिन लोगों का पुलिस पर लगातार विश्वास बढऩे से माओवादी कामयाब नहीं हो पा रहे हैं।

पिछले वर्ष विभिन्न मामलों में संभाग भर में दर्ज मामले
विगत वर्ष २०१९ में संभाग भर में हत्या के १८९, हत्या के प्रयास १८४, अपहरण व व्यपहरण १९७, डकैती के ३०, लूट के २५, नकबजनी के २४४, चोरी ३४८, धोखाधड़ी के १२७, धोखाधड़ी के १२७, आगजनी के ४६, चोट के ५३२, दहेज मृत्यु के १, शीलभंग १०२, महिला पर घटित अपराध ४३, सडक़ दुर्घटना ५९७ व अन्य अपराध २०४२ दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा स्थानीय व विशेष अधिनियम के तहत सट्टा, जुआ, आबकारी, विस्फोटक, मोटरयान, आईटी एक्ट, आवश्यक वस्तु अधिनियम व अन्य अधिनियम के कुल ३४८७९ प्रकरण दर्ज किए गए हैं। वहीं ६५१२ मामलों में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है।

विगत वर्ष खुले थे सात कंैप, वर्ष २०२० में भी खुलेंगे नए कैंप
द क्षिण बस्तर में अब भी ऐसे कई सघन माओवाद प्रभावित क्षेत्र हैं, जहां कैंप खोलने की जरुरत है। इसकी रुपरेखा तैयार की जा रही है, हालांकि सुरक्षागत कारणों से इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि वर्ष २०१९ में बीजापुर में बोदली व पुसनार, नारायणपुर में खोडग़ांव, दंतेवाड़ा में छिदंनार, पोटाली व चिकपाल, कांकेर में सुरेली कैंप खोला गया है। इसी तरह लगातार कैंप खोले जाने के साथ ही आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों का विश्वास जीतने में पुलिस सफलता हासिल कर रही है। सिविक एक्शन, खेल प्रतियोगिता, चिकित्सा शिविर व विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है।

माओवाद को कमजोर करने हुए सफल
आईजी पी सुंदरराज ने बताया कि बस्तर संभाग में पुलिस की संयुक्त टीम माओवादियों को कमजोर करने किया है और हर मोर्च पर लगातार पीछे ढकेलने में सफल हुई है। चाहे वह नक्सली घटना, मुठभेड़, आईइडी ब्लास्ट, सुरक्षाकर्मी की मौत व घायल होना, जनमानस को नुकसान होने की बात हो, इन सभी में वर्ष २०१९ में पुलिस माओवादियों के मंसूबों को नाकाम करने में कामयाब रही है। आने वाले वर्ष २०२० में भी माओवाद को जड़ से खत्म करने की काशिश निरंतर जारी रहेगी।

सडक़ हादसे रोकना सबसे बड़ी चुनौती
आईजी पी सुंदरराज ने कहा सडक़ वाहनों की संख्या बढऩे के साथ ही सडक़ हादसों में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है। जिसे रोकना हमेशा से स्थानीय और प्रदेश स्तर पर पुलिस के सामने बढ़ी चुनौती रही है। पुलिस के द्वारा लोगोंं यातायात के प्रति जागरुकता कार्यक्रम चलाकर इन हादसो को रोकने का प्रयास किए जा रहे हैं।

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