नगरीय निकाय चुनाव में महिलाओं के आरक्षण से गड़बड़ा सकता है भाजपा का गुटीय समीकरण

निगम के 48 वार्ड में 16 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिए जाने से कई दिग्गजों का गणित गड़बड़ा गया है।

By: Badal Dewangan

Updated: 27 Nov 2019, 10:43 AM IST

जगदलपुर. नगरीय निकाय चुनाव को भारतीय जनता पार्टी किसी भी हाल में जीतने की जद्दोजहद में है। संगठन ने भी इसके लिए कमर कस ली है। पार्टी ने इसे लेकर पार्टी कार्यालय में बीते कई दौर की हुई बैठक में अपना रुख साफ कर दिया है कि दो से तीन बार के विजेताओं व जनाधार वाले पार्षद को फिर से अवसर दिया जाएगा।

कार्यकर्ताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ेगा
नगर निगम में भाजपा के दर्जन भर पार्षद इसमें योग्य भी साबित हो रहे हैें। पार्टी के इस रुख की राह में सबसे बड़ा रोड़ा साबित हो रहा है सीटों का आरक्षण। निगम के 48 वार्ड में 16 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिए जाने से कई दिग्गजों का गणित गड़बड़ा गया है। अपने वार्ड को सुरक्षित मानकर की गई तैयारियां भी धरी की धरी रह गई हैं। दरअसल इनके करीबी वार्ड में सक्रिय पदाधिकारी भी इस चुनाव में ताल ठोंकने की तैयारी में हैं, स्वाभाविक है कि बीते पांच साल तक ये इसलिए सक्रियता दिखाते रहे कि उनके वार्ड में या तो वे स्वयं या उनके चहेते को उम्मीदवार बनाने में वेे सफल होंगे। ऐसे में यदि पार्टी विजेता उम्मीदवारों को एयरलिफ्ट करती है तो निश्चित ही उन्हें ऐसे कार्यकर्ताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ेगा।

विधानसभा वाले फार्मुले से परहेज
पहले हुए निकाय चुनाव ज्यादातर चर्चित चहरे एयरलिफ्ट कर चुनाव जीतने सफल भी हुए हैं, पर इस बार स्थिति थोड़ी अलग इसलिए है कि कार्यकर्ता पार्टी के इस कदम की तुलना विधानसभा चुनाव से कर रहे हैं, जिसमें चर्चित चेहरों को दोहराने की वजह से भाजपा की करारी हार हुई थी। इसलिए एयरलिफ्ट वाले स्टंट से अंतकर्लह व बागी होने के कयासों से भी भाजपा को अपना बचाव करना भारी पड़ सकता है। दस दिनों के अल्प समय में पार्टी को पूर्व में हारे हुए वार्ड में प्रत्याशी चयन के साथ ही एयरलिफ्ट उम्मीदवारों को विवादों से परे रखते टिकट देने का निर्णय करना पड़ेगा।

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