जो किसान धान बेचकर भरते हैं अपना पेट, जानिए क्यों अब वो ही सडक़ पर फेंक रहे अपना पूरा धान

बुधवार को सुकमा जिले के कोर्रा ग्राम पंचायत में भी बाजार भरता है। वहां भी व्यापारियों को जिला प्रशासन के कर्मचारियों ने धान खरीदी करने से रोक दिया है।

By: Badal Dewangan

Published: 21 Nov 2019, 11:54 AM IST

सुकमा. सुकमा जिले में धान खरीदी को लेकर जिला प्रशासन कड़ा रुख अपना रही है। एसडीएम, तहसीलदार सहित कलक्टर भी धान खरीदी को लेकर बिचोलिये को धान नहीं खरीदने देने की ठान लिए है।

किसान अत्यधिक परेशान हो रहे
राज्य सरकार धान खरीदी करने में देरी कर रही है व 2500 रुपये में धान खरीदी करने को लेकर अभी तक असमंजस में है। परंतु इन सभी कारणों से सुकमा जिले के छोटे बड़े किसान सभी परेशान है जहां बस्तर के आदिवासी किसान धान, महुआ, टोरा, इमली, अमचूर, छोटे व्यापारियों को बेच कर अपनी जीविका चलाने में निर्भर रहते है वहीं जिला प्रशासन के इस कड़े रुख व राज्य सरकार की धान खरीदी में देरी की वजह से किसानों में रोष देखने को मिल रहा है। किसान अत्यधिक परेशान हो रहे हैं।

किसान परेशान
किसान बाजारों में छोटे पैमाने में अपनी सामग्री बेचना तो चाह रहा है। परंतु जिला प्रशासन की कड़ी कार्रवाई के डर से व्यापारी भी डरा हुआ है। जो किसान का धान नही ले रहा। जिससे छोटे किसानों को अपनी बेचने वाली सामग्रियों को वापस घर ले जाना पड़ रहा है।

कर्मचारियों ने धान खरीदी करने से रोक दिया
जिला प्रशासन के इस कड़े रुख से किसानों के साथ साथ व्यापारियों में भी रोष जो आज छिंदगढ़ में बाजार की सामग्री नही खरीदने की बात कर रहे है व व्यापारियों ने राज्य सरकार व जिला प्रशासन के इस रुख से नाराजगी जताते हुये एक दिवसीय हड़ताल की भी बात कही है। बुधवार को सुकमा जिले के कोर्रा ग्राम पंचायत में भी बाजार भरता है। वहां भी व्यापारियों को जिला प्रशासन के कर्मचारियों ने धान खरीदी करने से रोक दिया है। जिसके कारण व्यापारी छोटे किसानों का धान लिए बिना बैरंग अपने अपने घर आ गए जिससे व्यापारियों व किसानों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है।

व्यापारी व किसान एक साथ
भूपेश सरकार की जितनी भी निंदा की जाए कम है। बस्तर के आदिवासी छोटे पैमाने में बाजार में अपनी महुआ, इमली, धान ले जाकर व्यापारियों को बेचता है और बाजार से अपनी दैनिक उपयोगी सामान जैसे तेल, हल्दी, मिर्ची आदि खरीदता है। जो 50 सालो से अधिक वर्षो से चला आ रहा है। जिससे छोटे व्यापारियों को भी कुछ मुनाफा होता है व छोटे किसान भी अपनी कम मात्रा में सामग्री बेच कर अपने छोटी मोटी उपयोगी सामग्री बाजार से खरीदी करता है। परन्तु सरकार ने अब छोटे व्यापारियों व किसानों के पेट मे भी लात मारना चालू कर दिया है। परंतु चुप नही बैठेंगे। व्यापारी व किसान एक साथ है। सब मिलकर हक की लड़ाई लड़ेंगे।
हूंगाराम मरकाम, जिलाध्यक्ष भाजपा

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