लाॅकडाउन के बीच मझधार में फंसे पशुपालक, पशु आहार की दुकानों के लिए आदेश नहीं स्पष्ट, अब क्या....

शासन-प्रशासन को जल्द ही दुग्ध व्यवसाय से जुड़े किसानों के प्रति गम्भीरता से निर्णय लेना होगा। वरना दुग्ध व्यवसाय से जुड़े किसानों के दुधारू पशु बिना भोजन के दम तोडऩे लगेंगे।

गीदम. लॉक डाउन के बीच शासन ने अतिआवश्यक चीजों की दुकान खुली रखने का फरमान जारी किया है, लेकिन सरकार पशुओं की चिंता नहीं कर रही है, दरअसल आदेश में पशुआहार की दुकान खोलने को लेकर कोई स्पष्ट आदेश नहीं है। ऐसी स्थिति में पशुपालक और किसान परेशान हैं, उन्हें अपने पशुओं के भूखे रहने की तकलीफ सता रही है। लॉक डाउन की अभी शुरुआत है इसलिए हालात काबू में हैं लेकिन जल्द ही इस पर कोई फैसला सरकार नहीं लेती है तो स्थिति भयावह हो सकती है।

शासन-प्रशासन को जल्द ही दुग्ध व्यवसाय से जुड़े किसानों के प्रति गम्भीरता से निर्णय लेना होगा। वरना दुग्ध व्यवसाय से जुड़े किसानों के दुधारू पशु बिना भोजन के दम तोडऩे लगेंगे। वही इस व्यवसाय से जुड़े किसानों को लाखों की आर्थिक क्षति भी होगी। लॉक डाउन के हालात में शासन ने अनिवार्य सेवाओ में मेडिकल स्टोर्स, किराना दुकान, दूध, सब्जी, फल को छोड़कर सारी दुकानों पर प्रतिबंध लगा दिया है। रोजमर्रा के सामानों में दूध के विक्रय पर तो छूट दी गई है। मगर प्रश्न यहा यह उठता है की आखिर किसान अपने पशुओं को इस दौरान भोजन की व्यवस्था कैसे करें। पशु आहार की दुकानों पर भी लॉक डाउन के चलते प्रतिबंध लगा हुआ है। पशु आहार की सारी दुकानें बंद हैं। दन्तेवाड़ा जिला ही नही सम्ंपूर्ण छतीसगढ़ के दुग्ध व्यवसाय से जुड़े किसानों के सामने बड़ी जटिल स्थिति दिखाई दे रही है कि वो अपने इन दुधारू पशुओं को कैसे पालें। छोटे और मझले किसान जो रोज दूध बेचकर अपने दुधारू गायों के लिए पशु आहार की व्यवस्था कर अपने परिवार का भरण पोषण करते है उनके सामने अब यह समस्या है की आखिर वो इन हजारो रुपए की एक-एक गाय का भरण पोषण कैसे करें।

पूरे जिले में बंद है पशु आहार की दुकानें
विगत दो दिनों से पशु आहार की सारी दुकाने बंद हैं। दंतेवाड़ा के किसानो को भूसा ओर पशु आहार की आपूर्ति करने के लिए दुकानदारों को धमतरी ओर रायपुर से दाना मंगाकर सप्लाई करना पड़ता है। वहां से सप्लाई नहीं हो रही क्योंकि वहां की दुकानें भी बंद हैं। ऐसे में इसका सीधा असर जिले पर भी पड़ा है। दूध की सप्लाई को सरकार ने जरूरी सेवा में गिना लेकिन जहां से दूध का उत्पादन हो रहा है, उस गौवंश के लिए सरकार ने कोई ढील नहीं दी है। यह एक चिंतनीय स्थिति है।

पशु आहार की दुकान खोलने की छूट मिले: दुग्ध गोपालक संघ
गीदम ब्लॉक के दुग्ध गोपालक संघ के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि राशन दुकानों की तरह किसानों के हितों में पशु आहार की दुकानों पर प्रतिबंध हटाया जाए। जिससे कि किसान अपने दुधारू पशुओं का आहार प्राप्त कर उनका भरण पोषण करते हुये प्रदेश के जरूरत मन्दों को दूध उपलब्ध करा सकें। उन्होंने कहा कि किसानों की हालात बेहद खराब हैं उनके पास यह स्थिति है कि दो दिनों का भी पशु आहार नही है। ऐसे में आने वाले दिनों में कैसे लाखों के दुधारू पशुओं को पाला जाये इसकी चिंता किसानों को सत्ता रही है।

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