कोरोना जांच रिपोर्ट नहीं मिली तो सीधे पहुंच गया वायरोलॉजी लैब, वहां निकल गया पॉजिटिव

बस्तर में कोरोना का कहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेज में आए दिन लापरवाही सामने आ रही है।

By: Bhawna Chaudhary

Published: 25 Aug 2020, 03:52 PM IST

जगदलपुर. बस्तर में कोरोना का कहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेज में आए दिन लापरवाही सामने आ रही है। सैंपल लेने के 8 से 10 दिनों बाद भी रिपोर्ट मिल रहा है। समय पर जांच रिपोर्ट नहीं मिलने पर लोगों को काफी परेशानी हो रही है। रिपोर्ट नहीं मिलने पर सोमवार को एक कोरोना संदिग्ध व्यक्ति सीधे मेडिकल कॉलेज के वायरोलॉजी लैब पहुंच गया।

लापरवाही 01:
रायपुर हाउसिंग बार्ड निवासी एक कोरोना संदिग्ध मरीज का करीब 10 दिनों पहले जांच के लिए सैंपल लिया गया था। संदिग्ध मरीज रिपोर्ट के लिए रोजाना स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करता रहा लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। ऐसे में वह परेशान होकर रिपोर्ट के लिए सीधे मेडिकल कॉलेज के वायरोलॉजी लैब पहुंच गया। उसे कोविड 19 वार्ड में भर्ती किया गया।

लापरवाही 02: पॉजिटिव मरीज घूमता रहा बाजार में, विभाग को भनक तक नहीं
निगम कर्मचारी का 19 अगस्त को कोरोना पॉजिटिव आया इसी दिन कर्मचारी को फोन करके बताया कि ह पॉजिटिव है। देर रात तक कोविड-19 हॉस्पिटल में भर्ती करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची। ऐसे में वह दूसरे दिन सुबह राशन और सब्जी खरीदने के लिए बाजार चला गया। इस बीच वह बाजार में कई लोगों के संपर्क में भी आया। यही नहीं मेकाज में भी वह कई लोगों से मिला। संविधान के बावजूद कार्य में लापरवाही बरती जा रही है। जिसकी मॉनिटरिंग करने वाला कोई नहीं है।

लापरवाही 03: बुजुर्ग को बिना पूरा उपचार भेजा वापस
शहर के एक 70 वर्षीय बुजुर्ग को संक्रमित पाए जाने पर मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए भर्ती किया गया था। उन्हें दस दिन बाद डिस्चार्ज कर दिया। इसके बाद वे पुनः संक्रमण की चपेट में आ गए। इससे उन्हें फिर भर्ती किया गया है। परिजन का कहना है कि सरकार ने बुजुर्ग का दो बार टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही डिस्चार्ज करने कहा है। इधर मेकाज का अपना अलग नियम से लोग बेहद परेशान दिन हो रहे हैं।

सही मॉनिटरिंग नहीं
मेडिकल कॉलेज में कोरोना जांच के लिए दो-दो आरटीपीसीआर जांच मिशन है। एक मशीन से दिनभर में करीब 7 से 8 सौ सैंपल की जांच होती है। बावजूद जांच रिपोर्ट के लिए संदिग्ध व्यक्तियों को 8 से 10 दिनों बाद भी रिपोर्ट नहीं मिल पा रहा है। वहीं संभाग के सभी जिलों में एंटीजन किट से भी जांच की जा रही है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज के वायरोलॉजी लैब में इन दिनों सैंपल की संख्या भी कम हो गई है। इसके बाद भी समय पर न तो जांच हो पा रहा और न ही रिपोर्ट मिल पा रहा है। मेडिकल कॉलेज में सारी सुविधाएं होने के बावजूद कार्य में लापरवाही बरती जा रही है। जिसकी मॉनिटरिंग करने वाला कोई नहीं है।

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