खतरा.... पैदल बढ़ रहा बस्तर की ओर, बाहरी राज्यों से देर रात गुपचुप तरीके से हो रहे जिले में दाखिल

गांवों में होम आइसोलेशन का पालन करवाने अब तक नहीं हुई कोई पहल, शहरों की तरह गांवों में भी होम आइसोलेशन की मॉनिटरिंग की है दरकार

By: Badal Dewangan

Updated: 29 Mar 2020, 04:34 PM IST

जगदलपुर. बस्तर में फिलहाल एक भी कोरोना पॉजीटिव केस सामने नहीं आया है, लेकिन पिछले तीन दिनों में सीमावर्ती राज्यों से बस्तर में दाखिल हुए ग्रामीण मजदूर खतरा बढ़ा सकते हैं। दरअसल ज्यादातर मजदूर आंध्र और ओडिशा की सीमा से बस्तर की ओर दाखिल हो रहे हैं। १५ से २० की टोली में आ रहा मजदूरों का दल रात के वक्त बॉर्डर क्रॉस कर रहा है। कई मजदूर जंगलों के रास्ते आ रहे हैं।

ग्रामीणों के होम आइसोलेश की भी उसी तरह मॉनीटरिंग हो
माओवाद प्रभावित इलाकों में पुलिस सडक तक ही सीमित है इसलिए खतरा और बढ़ जाता है। फिलहाल प्रशासन ने इस दिशा में काम करना शुरू नहीं किया है। जरूरत है कि समय रहते इस ओर ध्यान दिया जाए और बाहरी राज्यों से आ रहे ग्रामीणों को होम आइसोलेशन का मतलब भी समझाया जाए। बस्तर की सीमाओं पर सिर्फ टेम्परेचर चेक करने की खानापूर्ति की जा रही है। जबकि टेम्परेचर सामान्य होने के बाद भी कोरोना के लक्षण 8 से 10 दिन में दिख सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि ग्रामीणों के होम आइसोलेश की भी उसी तरह मॉनीटरिंग हो जैसे शहरों में हो रही है।

पुलिस खुद तोड़ रही सोशल डिस्टेंसिंग का नियम
शहर में लॉकडाउन को प्रभावी बनाने के लिए पुलिस विभाग का अमला दिन-रात जुटा हुआ है, लेकिन इस बीच पुलिस भी कुछ नियम तोड़ते हुए नजर आ रही है। प्रधानमंत्री ने सोशल डिस्टेंसिंग का नियम कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन शहर में पुलिस की एक गाड़ी में ५ से ज्यादा जवान सवार होकर पेट्रोलिंग कर रहे हैं। अगर पुलिस के पास वाहनों की कमी है तो अफसरों को इसे संज्ञान में लेकर तत्काल इस कमी को दूर करना चाहिए।

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