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बस्तर के इंजीनियर्स का हौसला पूरे देश में है खास क्योंकि यहां ब्लास्ट और हत्या है आम

पत्रिका इंजीनियर्स डे विशेष: धुर नक्सल प्रभावित इलाकों में सडक़, पुल-पुलिया बनवाने की चुनौतियों का कर रहे सामना

जगदलपुर

Published: September 14, 2022 08:35:18 pm

जगदलपुर। आज इंजीनियर्स डे है और इस रिपोर्ट के जरिए हम बस्तर के इंजीनियर्स के जज्बे की बात कर रहे हैं। बस्तर पूरे देश में एक ऐसा इलाका है जहां विकास की राह आसान नहीं है। अब तक जितनी भी सरकार प्रदेश में रही उसकी प्राथमिकता बस्तर में सडक़ों का जाल बिछाना रहा ताकि विकास अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। पिछली सरकार में इस पर काफी काम हुआ और मौजूदा सरकार भी इसी उद्देश्य के साथ आगे बढ़ रही है लेकिन बस्तर में सड़क़ों का जाल बिछाना शुरुआत से ही सबसे मुश्किल काम रहा है। इस काम में सबसे बड़ी चुनौती नक्सली हैं। नक्सली सडक़ों के निर्माण का विरोध करते हैं, उनका मानना है कि सडक़ें बनेंगीं तो उनके प्रभाव क्षेत्र तक फोर्स और सरकार का दखल बढ़ेगा। इसलिए वे सडक़ निर्माण के काम को प्रभावित करते रहते हैं। इसी जोखिम और चुनौती के बीच बस्तर के इंजीनियर्स सालों से काम कर रहे हैं। बस्तर के अंदरूनी इलाके तक सडक़ पहुंचाना आसान नहीं है लेकिन हमारे इंजीनियर्स दिन-रात परिवार से दूर इस जोखिम का सामना कर रहे हैं। सरकारी हो या प्राइवेट हर तरह के इंजीनियर्स और सडक़ निर्माण से जुड़े सपोर्टिंग स्टाफ को नक्सली जान से मारने की धमकी देते रहते हैं। कई बार इंजीनियर्स को अगवा भी किया जा चुका है। प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के अलावा सरकार की सडक़ बनाने वाले ठेकेदारों के इंजीनियर्स को नक्सली अपने साथ ले जा चुके हैं और उनके साथ मारपीट कर उन्हें यह चेतावनी देते हुए छोड़ा कि वे दोबारा काम पर ना लौटें लेकिन इन चुनौतियों के बीच भी इंजीनियर्स अपने काम में डटे हुए हैं।
Bastar road
दंतेवाड़ा जिले में धुर नक्सल प्रभावित जगरगुंडा तक बनी देश की सबसे मुश्किल सडक़
इंजीनियर्स को डराने गाडिय़ां फूंकते हैं, ब्लास्ट करते हैं
बस्तर में नक्सली इंजीनियर्स को डराने और काम छोडऩे के लिए मजबूर करते ही रहते हैं। कई बार नक्सली सडक़ और पुल-पुलिया के निर्माण में लगी गाडिय़ों के आग के हवाले कर देते हैं तो कभी नक्सली जिस जगह सडक़ बन रही होती है वहां ब्लास्ट भी करते हैं। आए दिन इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इसके बावजूद इंजीनियर्स अपनी जान की परवाह किए बगैर अपने मिशन में जुटे रहते हैं। नक्सल प्रभावित इलाके में काम कर चुके और वर्तमान में शहर में काम कर रहे पीडब्ल्यूडी विभाग के एक इंजीनियर ने बताया कि नक्सली कई बार सीधे साइट तक पहुंच जाते हैं और इंजीनियर के साथ ही ठेकेदार को काम छोडऩे की धमकी देते हैं। ऐसी धमकियों की परवाह किए बगैर इंजीनियर और ठेकेदार अपना काम कर रहे हैं।
बारुद के ढेर पर तैयार की देश की सबसे खतरनाक सडक़
दंतेवाड़ा से जगरगुंडा के बीच तैयार हुई सडक़ को प्रदेश की सबसे खतरनाक सडक़ कहा जाता है। सडक़ इसलिए खतरे और जोखिम से भरी हुई मानी जाती है क्योंकि जब इसका निर्माण हो रहा था तब १०० से ज्यादा आईईडी नकुलनार से अरनपुर के बीच बरामद किए गए थे। यह सडक़ दंतेवाड़ा को सीधे सुकमा जिले से जोड़ देती है। जगरगुंडा को कभी नक्सलियों की राजधानी भी कहा जाता था। यह इलाका सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा की सरहद पर स्थित है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस सडक़ को तैयार करना इंजीनियर्स के लिए कितना जोखिम भरा रहा होगा।
बस्तर में हर कदम पर जोखिम, इसका सामना करना ही हमारा काम
जिस तरह से बस्तर में फोर्स नक्सल उन्नमूलन में जुटी हुई है, उसी तरह से हमारे इंजीनियर्स बस्तर में विकास की राह तैयार करने का काम कर रहे हैं। यह काम आसान नहीं है। बस्तर में हर कदम पर जोखिम है और उसका सामना करना ही हमारा काम है। एनएच के अंतर्गत बस्तर संभाग की जो सडक़ें हैं वह नक्सल प्रभावित इलाकों से होकर भी गुजरती हैं। हमने नक्सल प्रभावित इलाके बीजापुर में कई बड़े पुल का निर्माण करवाया है। इसमें हमारे इंजीनियर्स की भूमिका अहम रही है। हमारी कई महिला इंजीनियर्स भी निडरता और जज्बे के साथ काम कर रही हैं।
आरके गुरु, ईई, एनएच बस्तर

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