scriptexclude converts from the list of scheduled tribes | धर्मान्तरित व्यक्तियोंं को अनुसूचित जनजाति की सूची से करें बाहर | Patrika News

धर्मान्तरित व्यक्तियोंं को अनुसूचित जनजाति की सूची से करें बाहर

जगदलपुर। धर्मान्तरित व्यक्तियोंं को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर करने की मांग को लेकर जनजाति सुरक्षा मंच ने की है। रविवार को दंतेश्वरी मंदिर के सामने टाऊन क्लब मैदान में जनजाति सुरक्षा मंच के बैनर तले अनुसूचित जनजाति के पदाधिकारियों के नेतृत्व में जनजाति सुरक्षा मंच की ओर से विशाल रैली निकाली गई। जिसमें हजारों की संख्या में लोग हाथ में झण्डे और बैनर थामे शामिल हुए।

जगदलपुर

Updated: May 16, 2022 08:35:52 pm

अनुसूचित जनजाति के पदाधिकारियों के नेतृत्व में नगर में निकली विशाल रैली

धर्मांतरण की वजह से अनुसूचित जनजाति वर्ग अपने हक से हो रहे हैं वंचित

इस दौरान जनजाति सुरक्षा मंच मध्यप्रदेश के प्रांत संयोजक कैलाश निनामा, राजपरिवार के सदस्य कमलचंद्र भंंजदेव, भोजराज नाग, कालूसिंह, महादेव बघेल व डॉ रूपचंद मेड़ा उपस्थित थे। जनजाति सुरक्षा मंच मध्यप्रदेश के प्रांत संयोजक कैलाश निनामा ने कहा धर्मान्तरित जनजातियों को आरक्षण सुविधाएं दिए जाने के खिलाफ बिहार के तत्कालीन जनजाति नेता एवं लोकसभा सदस्य स्व कार्तिक उरांव द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को 1979 में एक आवेदन दिया था, लेकिन आवेदन को ना लोकसभा के पटल पर रखा गया था और ना ही खारिज किया गया, बल्कि ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। उक्त विसंगति के कारण अपने हकों से वंचित देशभर की जनजातियों ने 30 अप्रैल 2006 को रायपुर में जनजाति सुरक्षा मंच का गठन किया। इस अवसर पर 14 राज्यों के 85 जनजाति प्रतिनिधियों ने हिस्सेदार की। इस मंच का एकमात्र उद्देश्य जनजातीय समाज में से धर्मांन्तरित होकर अपने पूर्वजो (परम्परागत-सनातन) के धर्म को छोड़कर ईसाई या मुस्लिम बनकर आरक्षण का लाभ उठाने के विरुद्ध आवाज उठाना है और असली जनजाति समाज को उनका हक दिलाना है। उन्होने कहा कि देश की 700 से अधिक जनजातियों के विकास एवं उन्नति के लिए संविधान निर्माताओं ने आरक्षण एवं अन्य सुविधाओं को प्रावधान किया था। संविधान की मंशा अनुरुप भारत के वन क्षेत्र में प्राचीनकाल से निवास कर रहे अनुसूचित जनजाति समुदाय का अर्थ है, भौगोलिक दूरी, विशिष्ट संस्कृति, बोली भाषा, परम्परा एवं रूढ़िगत न्याय व्यवस्था, सामाजिक आर्थिक पिछड़ापन और संकोची स्वभाव है।
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मंच पर उपस्थित आदिवासी समाज के पदाधिकारी व राजपरिवार के सदस्य कमलचंद्र भंंजदेव
- सड़क से लेकर सदन तक होगी लड़ाई

धर्मांन्तरित जनजातियों को दोहरा लाभ के कारण जनजातियों का विकास नहीं हो रहा है। जनजातिय वर्ग के युवा दर-दर भटकने मजबरू हैं। वास्तविक जनजातियों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ जनजाति सुरक्षा मंच सालों से लड़ाई लड़ते आया है। धर्मान्तरित लोगों द्वारा दोहरा लाभ लेकर आर्थिक व शैक्षणिक दृष्टि से वास्तविक जनजातियों से काफी अच्छी स्थिति में हैं। इसलिए देशभर में जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा जागरूकता रैली का आयोजन किया जा रहा है। इसके बाद मांग को लेकर सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ी जाएगी।
- धर्मान्तरित जनजातियों का आरक्षण समाप्त करने की मांगधर्मान्तरित जनजातियों का आरक्षण समाप्त करने की मांग को लेकर देशभर में आंदोलन करने जनजाति सुरक्षा मंच का गठन 2006 में किया गया। इसके बाद 2009 में देशभर में हस्ताक्षर चलाया गया और तत्कालीन राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया था। यदि कोई व्यक्ति जिसने जनजाति आदिम तथा विश्वासों का परित्याग कर दिया हो और ईसाई या ईस्लाम धर्म ग्रहण कर लिया हो। वह अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं माना जाएगा। ऐसे ही कोई व्यक्ति सिख या हिन्दू धर्म को छोड़कर अन्य कोई धर्म ग्रहण करता हो तो वह अनुसूचित जाति का नहीं माना जाएगा।

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