राजनीतिक संरक्षण से चलता है बड़ा सट्टा, पुलिस करती है सिर्फ छोटे जुआरियों पर कार्रवाई

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर शहर में लाखों का जुआ और सट्टा पुलिस के नाक के नीचे चल रहा है।

By: Deepak Sahu

Published: 19 Jan 2019, 06:19 PM IST

जगदलपुर. छत्तीसगढ़ के जगदलपुर शहर में लाखों का जुआ और सट्टा पुलिस के नाक के नीचे चल रहा है। जबकि पुलिस बस दिखावे के लिए छोटे जुआरियों पर कार्रवाई कर खानापूर्ति कर रही है।

जगदलपुर से लगे आड़ावाल, धरमपुरा और आसना से सटे जंगल जुआरियों और जुआ खिलाने वालों का स्थायी पसंदीदा अड्डा बन चुके हैं। रात के अंधेरे में यहां लाखों का दांव लगता है। शहर का छोटा-बड़ा शख्स जुआ खेलने यहां पहुंचता हैं। जिन्हें पुलिस से संरक्षण देने की जिम्मेदारी जुआ खिलाने वालों की होती हैं। जिनके पास जुआ खेलने को रकम नहीं होता, उन्हें यहां प्रतिदिन की दर पर 10 प्रतिशत ब्याज पर रकम देकर जुआ खिलाया जाता है। इसके बाद वह इस कर्ज और ब्याज के चक्रव्यूह में ऐसा फंसता है, कि उसका इस जाल से निकलना मुश्किल हो जाता है। पुलिस का खौफ इन्हें जरा भी नहीं है, या फिर पुलिस का ही संरक्षण प्राप्त है? यह जुआ का धंधा विगत कई वर्षों से यहां चल रहा है।

पुलिस के सामने एक बड़ी चुनौती
छोटे जुआरियों तक पुलिस आसानी से पहुंच जाती है, लेकिन जुआ का कारोबार चलाने वाले इन बड़े खाइवाल तक पहुंचने से पहले ही इन्हें राजनीतिक संरक्षण देने वालों का फोन पहुंच जाता है। जिसके बाद पुलिस को भी अपने कदम पीछा करने पड़ते हैं। ऐसे में चाहकर भी पुलिस इन्हें पकड़ नहीं पाती है, पुलिस महकमा के सामने इन्हें पकडऩा किसी चुनौती से कम नहीं है।

चप्पे-चप्पे पर निगरानी में लगे रहते हैं गुर्गे
जुआ और सटट खाईवाल ने यहांं अपना एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर किया है। जिसमें 20 से 25 लोग निगरानी का काम करते हैं। जब आसना के जंगल में वीराने में चल रहा होता है। तब इनके गुर्गों का काम होता है, कि वे इस एरिया में पुलिस के मूवमेंट की जानकारी उन्हे पल-पल देते रहे। बकायदा इन गुर्गोंं को मोबाइल दिया जाता है। जिससे वे जुआ खाइवाल से संपर्क साधे रहते हैं।

जुआ और सट्टा में हारकर बन रहे अपराधी
जुआ कई लोगों की जिंदगी तबाह कर चुकी है और कईयों की बर्बाद कर रही है। लोग जुआ और सट्टा में अपनी पूंजी और संपत्ति हारकर क्राइम की ओर कदम बड़ा रहे हैं। चोरी, लूट, जैसे अपराधिक गतिविधियों में न चाहते हुए भी शामिल हो रहे हैं। जिन्हें यह रास्ता पसंद नहीं वे आत्महत्या को मजबूर होते हैं। ऐसे कई मामले सामने आते हैं।

जुआ खाईवाल का ही कानून चलता है यहां
जुआ खिलाने वालों ने यहां अपना ही कानून बना रखा है। इनके सख्त नियम कायदे ही यहां लागू होते हैं। जुआ खेलने ये बड़े आसामियों को पहले लालच देकर इसमें शामिल करते हैं। यदि एक बार जुआरी इनके झांसे में आ गया, तो वह इस चक्रव्यू से निकल पाना मुश्किल होता है। जब वह हार नहीं जाते, तब तक उसे जाने नहीं दिया जाता। जुआ के दांव में जितने वाला इनका शख्स होता है।

सूचना मिलेगी तो कार्रवाई करेगी
नगर पुंलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार ने बताया कि पहले भी जुआ खेलने और खिलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करती रही है। छोटे बड़े जुआ, सट्टा के खाइवाल को नहीं बख्शा जाएगा।

Deepak Sahu
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