करोड़ों रुपए फूंकने के बाद भी 211 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए भवन नहीं बना पाई सरकार, जानिए क्या है असली कारण

किराए के एक कमरे में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र, न बैठने की जगह, न खेल के मैदान

जगदलपुर. बस्तर में अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्र किराए के मकानों में संचालित हैं। किराए में चल रहे केंद्रों में बच्चों के खेलने के लिए जगह नहीं होने की वजह उन्हें खाना खिलाकर वापस भेज दिया जाता है। जबकि बच्चों को सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक केंद्र में ही रूकना है, लेकिन यहां पर बच्चों को रेडी टू ईट और मध्यान्ह भोजन खिलाने के बाद घर भेज दिया जाता है।

आंगनबाड़ी केंद्रों में शौचालय तो दूर बिजली व्यवस्था भी नहीं है
पत्रिका की टीम ने गुरुवार को किराए के भवन में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों का पड़ताल करने पहुंची। बस्तर जिले में १८६१ आंगनबाड़ी केंद्र और १२० मिनी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहा है। इसमें २११ आंगनबाड़ी और ५७ मिनी आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवनों में चल रहा है। शहरी क्षेत्र के ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवन में चल रह है। किराए में चलने वाले कई आंगनबाड़ी केंद्रों में शौचालय तो दूर बिजली व्यवस्था भी नहीं है। जिससे गर्मी के दिनों में बच्चों को काफी दिक्कत होता है। इसके बाद भी महिला एवं बाल विकास विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले पर कोई पहल नहीं कर रहे हैं।

300 तक का दिया जा रहा किराया
किराए में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के लिए शासन से करीब ७०० से ३ हजार रुपए दिया जाता है। किराए के भवनों में सुविधाओं के अनुसार किराए तय किया जाता है, लेकिन शहर में किराए में संचालित केंद्रों में सुविधा नहीं होने के बावजदू २ से ३ हजार रुपए तक किराए दिया जा रहा है, जिसकी मॉनिटरिंग करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में यहां पर आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन में सिर्फ खानापूर्ति किया जा रहा है।

200 से अािक आंगनबाड़ी भवन है निर्माणाधीन
बस्तर में करीब २१४ आंगनबाड़ी भवन निर्माणाधीन है। जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते निर्माण पिछड़ता जा रहा है। १६५ आंगनबाड़ी और मिनी आंगनबाड़ी भवन निर्माण के लिए स्वीकृति मिल गई है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू पूरा कर लिया जाएगा। वहीं २१ केंद्रों के निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

इस प्रकार है आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत, बच्चों के बैठने के लिए भी जगह नहीं है
सिविल लाइन स्थित आंगनबाड़ी केंद्र कच्चे मकान के एक छोटे से कमरे में संचालित हो रहा है, जिसका दो हजार रुपए किराया दिया जा रहा है। इस केंद्र में १२ बच्चे दर्ज है। रोजाना ६ से ७ बच्चे ही आते हैं। यदि पूरे बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र पहुंच जाए तो उनके बैठने के लिए ही जगह नहीं रहेगी। वहीं केंद्र के बाहर बच्चों के खेलने के लिए जगह भी नहीं है।

आंबा के बाहर गली में खेलते हैं बच्चे
भगत सिंह वार्ड के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक १ भी किराए के मकान में चलता है। इस केंद्र में करीब १४ बच्चे दर्ज है। इस आंगनबाड़ी में जगह की कमी के कारण बच्चे बाहर ही खेलते नजर आए। वहीं १४ में से सिर्फ ८ से ७ बच्चे ही मौजूद थे। यदि सभी बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र आ जाए, तो उनके बैठने के लिए जगह ही नहीं रहेगा। इस केंद्र का किराए करीब १२०० रुपए दिया जाता है।

लाइट और पंखे तक की सुविधा नहीं
भगत सिंह वार्ड के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक - २ किराए भी किराए के कमरे में संचालित हो रहा है। इस केंद्र में लाइट और पंखे तक की सुवधिा नहीं है। इस आंगनबाड़ी केंद्र का किराए तीन हजार रुपए तक दिया जाता है। वहीं किराए के अनुसार यहां पर कोई व्यवस्था नहीं है। इस केंद्र में १२ बच्चे दर्ज हैं, जिसमें रोजाना ७-८ बच्चे ही आते हैं। बिजली कनेक्शन नहीं होने के कारण बच्चे यहां पर ज्यादा देर तक रूकते ही नहीं हैं।

Badal Dewangan
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