माओवादियों ने खेला आदिवासी कार्ड, मड़ावी हिड़मा को सौपी ये बड़ी जिम्मेदारी

कमेटी में देश भर से मात्र 20 सदस्य होते हैं। ये बड़े ऑपरेशन के लिए फैसला लेने में सक्षम होते हैं। हिड़मा अब सीधे पोलित ब्यूरो के लिए जवाबदेह होगा।

By: ajay shrivastav

Updated: 11 Sep 2017, 11:49 AM IST

जगदलपुर. माओवादियों पर यह आरोप लगता रहा था कि वे बस्तरवासियों को उच्च पद न देते हुए अपने फायदे के लिए उपयोग करते हैं। इधर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार माआेवादियों ने इस बार गणेश उइके को दरकिनार कर बस्तर के मिलीट्री प्लाटून से जुड़े माड़वी हिड़मा को सेंट्रल कमेटी का मेंबर बनाया है।

हिड़मा को मिली जिम्मेदारी से पुलिस की परेशानी बढ़ी
सूत्रों की माने तो अगस्त के अंतिम सप्ताह में बीजापुर इलाके में माओवादियों की आयोजित समीक्षा बैठक में हिड़मा का रैंक बढ़ा कर उसे सेंट्रल कमेटी का सदस्य बना दिया गया है। हिड़मा को मिली नई जिम्मेदारी से पुलिस की परेशानी बढ़ गई है, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में जाकर पुलिस दलील देती थी कि माओवादी लीडर उनका शोषण करते हैं। मुठभेड़ में उन्हें पुलिस के सामने खड़े कर बड़े पदों पर बाहरी लोगों की भर्ती करते हैं।

सफलता का ईनाम
सूत्रों की माने तो बस्तर में पुलिस के लगातार बढ़ते दबाव के बाद उन्होंने बस्तर से ही किसी को माओवादी संगठन से जोडऩे का निर्णय लिया। इधर हिड़मा ने पुलिस के खिलाफ अपने कार्डर में कई सफलताएं हासिल की है, जिसे देखते हुए यह पद देने की बात सामने आ रही है।

कमेटी में देशभर के मात्र 20 सदस्य
कमेटी में देश भर से मात्र 20 सदस्य होते हैं। ये बड़े ऑपरेशन के लिए फैसला लेने में सक्षम होते हैं। हिड़मा अब सीधे पोलित ब्यूरो के लिए जवाबदेह होगा। पोलित ब्यूरो एक प्रकार से डिसिजन मेकिंग टीम होती है और सीसी मेंबर इस रणनीतियों को एरिया कमेटी तक पहुंचाकर निगरानी करता है। नए जिम्मेदारी से मिलिट्री विंग्स के सभी प्लाटून की कमान हिड़मा के हाथों आ गई जाएगी।

गणेश उइके को इसलिए नहीं मिला पद
डीकेएमएस के सचिव गणेश उइके हिड़मा से काफी अनुभवी व सीनियर है। बताया जाता है कि कुछ साल पहले गणेश से मिलने पहुंचा माओवादी आजाद पुलिस मुठभेड़ में फंस गया था, जिसके बाद से गणेश के खिलाफ माओवादी कमेटी जांच कर रही है। इसके चलते सीसी मेंबर से उसका नाम काट दिया गया।

पर्चा से देते हैं जानकारी
डीआईजी सुंदरराज पी ने बताया कि अभी इस मामले में कोई पुख्ता जानकारी पुलिस के पास नहीं है। माआेवादी हमेशा इस तरह की जानकारी पर्चा व पाम्पलेट फेंककर देते है।

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