scriptIt took 17 years to ring the school bell | स्कूल की घंटी बजने में लगे 17 साल | Patrika News

स्कूल की घंटी बजने में लगे 17 साल

अब हुआ पूरा गांव में स्कूल का सपना, सरकार की विश्वास बहाली की मुहिम ला रही है रंग, नक्सलगढ़ मोसला, कचिलवार और गुण्डापुर में खुले स्कूल, बच्चों के हाथो मे पहुंची कॉपी कलम और किताब

जगदलपुर

Published: September 12, 2022 09:01:01 pm

बीजापुर . अनगिनत बाधाओं और चुनौतियों को पार कर नक्सलगढ़ के ग्रामीण अपने गांव में 17 साल बाद स्कूल खोलवाने में कामयाब हुए। साल 2005 के सलवा जुडूम के दौर में आतंक और दहशत की गिरफ्त में सरकार की पहुंच से दूर होकर मुख्यधारा से कट गए थे। सरकार की विश्वास बढ़ाने और अंतिम छोर तक सरकार की योजनाओं को पहुंचाने की नीति ने एक बार फिर माओवाद प्रभावित इलाके में ग्रामीणो के दिल जीतने में कामयाबी पाई और मोसला कचिलवार गुण्डापुर जैसे नक्सलगढ़ में फिर अ, आ, इ, ई की गूंज सुनाई देने लगी है।
दरअसल बीजापुर जिला माओवादी प्रभाव की दृष्टि से राज्य ही नहीं पूरे देश में अतिसंवेदनशील इलाका है । आज भी यहां के सैकड़ों गांव सरकार, सरकारी अमले और सरकारी योजनाओं से कोसों दूर हैं। साल 2005 में नक्सल विरोधी सलवाजुड़ुम अभियान के दौर में यहां दहशत और आतंक के माहौल में सैकड़ो गांव और नागरिकों को विस्थापन का दंश झेलने को मजबूर कर दिया था। इस दौरान जिले में 350 स्कूल बंद हो गए और हजारों बच्चों के भविष्य पर ग्रहण लग गया।
सरकार की पहल और शिक्षा विभाग के प्रयासों से जिले में बीते 3 साल में 160 से ज्यादा स्कूल खुले लेकिन मोसला, कचिलवार और गुण्डापुर की चुनौतियों से पार नहीं पाया जा सका था। बीते 3 साल से ग्रामीणों से लगातार संपर्क कर विश्वास बहाली की मुहिम को अमली जामा पहनाने में शिक्षा विभाग की टीम अब जाकर सफल हुई जब ग्रामीणों की रज़ामन्दी के बाद एक झोपड़ी के स्कूल फिर से शुरू किए गए। इस दौरान गांव के मुखिया और पुजारी ने स्थानीय रीति रिवाज से पूजा अर्चना की और बच्चों के साथ राष्ट्रगान का गायन किया गया।
बीजापुर बीइओ मो. ज़ाकिर खान ने बताया कि कैका पंचायत दुर्गम और अतिसंवेदनशील इलाका है जहां आम नागरिक या सरकारी अमले का पहुंच पाना एक चुनौती है। मोसला, कचिलवार और गुण्डापुर के लिए 45 किलोमीटर का सफर कई बाधाओं को पार कर पहुंचाना होता है। रास्ते मे दहशत और नदी नालों को पार कर कीचड़ भरे रास्तों पर पैदल चलने की चुनौती मुहिम में बाधक बनते हैं। फिर भी शासन जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में सभी बच्चों को शिक्षा के अधिकार से जोड़ना है इसलिए तमाम चुनौतीयों के बीच बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम को आगे बढाने में कोशिश की जा रही है। जाकिर खान ने बताया की इस शिक्षा सत्र में मोसला में 34 कचिलवार में 32 और गुण्डापुर में 34 का दाखिला कराया गया। जिनके पढ़ने की जगह कुटिया के रूप में ग्रामीणो द्वारा तैयार किया गया है। जबकि कॉपी कलम किताब और स्कूली ड्रेस सरकार ने मुहैया कराई है।
स्कूल पहुंचकर उत्साहित बच्चे हाथों में तिरंगा पकड़े हुए।
स्कूल पहुंचकर उत्साहित बच्चे हाथों में तिरंगा पकड़े हुए।
कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने पत्रिका से कहा की ग्रामीणों की मांग के अनुरूप स्कूले शुरू की जा रही हैं। छात्रों की दर्ज संख्या में बढ़ोत्तरी के साथ अतिरिक्त शिक्षक की भी व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया की इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई गई है। अभी फिलहाल मौजूदा व्यवस्था में शुरू की गई है बारिश के बाद पक्के भवन की बनाए जायेंगे।

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