बुरगुम मुठभेड़ पर मौन रैली निकालते 17 एनएसयूआई कार्यकर्ता हिरासत में

बुरगुम मुठभेड़ पर मौन रैली निकालते 17 एनएसयूआई कार्यकर्ता हिरासत में
NSUI radical movement will

लोहंडीगुड़ा इलाके के ग्राम पंचायत कुमली में हुई ग्रामसभा जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते विवादों में फंस गई। सारा विवाद रविवार को ग्रासमभा में उठा।

जगदलपुर. बुरगुम मुठभेड़ में नाबालिग छात्रों के मौत के विरोध में सोमवार को मौन रैली में शामिल एनएसयूआई के 17 कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लेकर कुछ घंटों बाद छोड़ दिया।

पुलिसिया दमन के बीच एनएसयूआई की यह मौन रैली कांग्रेस भवन से करीब पांच से सात कदम के भीतर खत्म हो गई। इस दौरान यहां एनएसयूआई के प्रदेश सचिव शेख सद्दाम रजा, वरूण वानखेड़े, आशिफ अल, नावेद मोहम्मद, नायाब खान, अभिषेक अवस्थी, उस्मान रजा, रितेश सेठिया, अमित मंडल, नल कुमार, मुकेश कुमार, नीरेंद्र उसेंडी, हेमंत कुमार, कारन जोशु, शशि सोनी एव अजय सिंह मौजूद थे।

एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने बताया कि प्रदेश सरकार के आदेश और बस्तर पुलिस के निर्देशन में पोटाकेबिन के छात्र सुकालूराम और सोमडू राम को फर्जी मुठभेड़ में माओवादी बताकर मौत के घाट उतार दिया गया और अब इस मामले में लीपापोती की जा रही है। राजनीतिक पार्टियों के जांच में भी यह मुठभेड़ फर्जी साबित हुई है।

इसके विरोध में जब एनएसयूआई कार्यकर्ता लोकतांत्रिक तरीके से मौन रैली निकाल रहे थे तो उन्हें पुलिसिया दमन का शिकार होना पड़ा। सभी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने परपा थाना में करीब 2 घंटे तक हिरासत में रखने के बाद दोपहर 4 बजे छोड़ दिया। आगामी दिनों इस मामले को लेकर एनएसयूआई उग्र आंदोलन करेगी।

सुबह से ही तैनात जवान
एनएसयूआई की मौन रैली को देखते हुए कांग्रेस भवन के सामने सुबह से ही भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पुलिस ने इस इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया और रैली में शामिल होने आ रहे कार्यकर्ताओं को आने नहीं दिया।

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