आत्मा को शुद्ध करने जैन धर्म के अनुयायी कर रहे जप-तप और साधना, 25 को करेंगे क्षमा-याचना

अनुयायी साधना और जप तप कर जीवन को सार्थक बनाने की कर रहे हैं कोशिश। पर्यूषण पर्व का समापन 25 अगस्त को क्षमा-याचना पूजा के साथ होगा।

By: ajay shrivastav

Published: 22 Aug 2017, 08:41 PM IST

जीवन को सार्थक बनाने की कर रहे हैं कोशिश

जगदलपुर. जैन धर्म का मुख्य पर्व पर्युषण पर्व पर श्वेताम्बर जैन समाज के अनुयायी इन दिनों साधना और जप तप कर जीवन को सार्थक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। श्वेताम्बर सम्प्रदाय के जातकों ने बताया कि वे आठ दिन तक इस पर्व को मनाते है। इस दौरान वे विभिन्न आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि योग जैसी साधना कर आत्मा को शुद्ध करने का प्रयास करते हैं। इस दौरान कई जातक निर्जला व्रत भी करते हैं।

अनुयायियों ने किया अनुभव साझा
पर्यूषण पर्व का समापन 25 अगस्त को क्षमा-याचना पूजा के साथ होगा। अंतरचेतना को जागृत करने, आध्यात्मिक ज्ञान के प्रचार, सामाजिक सद्भावना एवं सर्व धर्म समभाव के कथन को बल देने के लिए मनाए जाने वाले पयूर्षण पर्व पर समाज के लोगों ने अपना अनुभव साझा किया।

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कोलकाता से पहुंचे अनुयायी ने कहा
कोलकाता से आए महेंद्र कुमार पारेख का कहना है की मैं तो यहा आकर बहुत खुश हूं। यहां बार बार आना चाहूंगा। बस्तर के लोग बहुत अच्छे है। एकता के साथ पर्व मना रहे है।

मिलजुल कर रहने का संदेश
अल्पना लूनिया ने बताया कि यह पर्व हमें मिलजुल कर रहना, अपने अंदर से सभी बुराइयों को हटाना, अपने से बड़े हो या छोटे हो उनको माफ करना साथ ही माफी मांगना भी सिखाता है। रही बात तप की तो वह इसलिए किया जाता है ताकि हम खुद को समझ सके।

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हमसे जुड़ रहे दूसरे समाज के लोग
श्वेताम्बर समाज संयोजक मदन लाल पारेख का कहना है की यह बड़ी बात है की समाज के सभी वर्ग के लोग जुड़ रहे है। खास बात यह है कि दूसरेे जगहों से भी तथा दूसरे समाज से भी लोग इस पर्व में शामिल हो रहे हैं।

यहां आकर अच्छा लगा
बैंगलुरू से शहर पहुंचे महेंद्र सिंह खदांची ने बताया कि रिटायरमेंट के बाद वे महाराज जी के साथ जहां तहां जाते रहते हैं। पहली बार जगदलपुर आना हुआ है। यहां आकर बहुत अच्छा लगा।

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