जानिए क्यों 611 साल से बस्तर के ही होकर रह गए है जग के ‘नाथ’

जानिए क्यों 611 साल से बस्तर के ही होकर रह गए है जग के ‘नाथ’

Badal Dewangan | Updated: 04 Jul 2019, 12:26:21 PM (IST) Jagdalpur, Jagdalpur, Chhattisgarh, India

Bastar Dussehra के बाद मनाया जाने वाला सबसे बड़ा पर्व है बस्तर का गोंचा, हर साल बनाया जाता है नया रथ प्रभु jagannath के लिए

 

 

अजय श्रीवास्तव/तपन यादव/जगदलपुर. आदिवासी बाहुल्य बस्तर संभाग में दशहरा के बाद सबसे बड़े पर्व गोंचा को माना जाता है। दोनों ही पर्व में बड़ी समानता है तो वह है मानवनिर्मित विशालकाय काष्ठ रथ का परिचालन। इस परंपरा को देखने व इसमें सहभागिता निभाने सभी वर्ग की उपस्थिति रहती है। 1408 ईं से अब तक गोंचा पर्व की Ratha Yatra निर्बाध रूप से चली आ रही है।

Read More : जब मौसी गुंडिचा के घर जनकपुरी जाते है जग के नाथ, फिर...

पर्व की शुरुआत हुई जो महापर्व में परिवर्तित
611 साल का इतिहास गवाह है कि jagannathpuri से आए भगवान श्रद्धालुओं के लिए बस्तर के नाथ बनकर रह गए। जगन्नाथपुरी की Ratha Yatra से अनुप्रेरित होकर यहं भी पर्व की शुरुआत हुई जो महापर्व में परिवर्तित हो गया है। यहां का गोंचा महापर्व भारत वर्ष का सबसे अनूठा Ratha yatra पर्व है जिसमें भगवान को हजारों तुपकियों से सलामी दी जाती है।

Read More : छह सौ साल पुरानी इस महापर्व की हुई शुरूआत, जानिए इस पर्व की खास बातें

उद्भव का लिखित इतिहास
शोधार्थी रुद्र नारायण पाणिग्राही बताते हैं कि, गोंचा बस्तर में सन 1313 में आरण्यक ब्राह्मण समाज के उद्भव का लिखित इतिहास संजोए हुए है। पत्रिका ने भी इस महापर्व में अपनी लेखन यात्रा को सतत जारी रखा है।

600 साल पुरानी बस्तर की Jagannath Rath Yatra गोंचा के बारे में जानने के लिए यहां CLICK करें

Chhattisgarh से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर Like करें, Follow करें Twitter और Instagram पर

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned