नक्सलियों ने किया पंचायत चुनाव का बहिष्कार, इधर इस पुलिस नक्सली मुठभेड़ को बताया फर्जी

माओवादियों ने इन पर्चों में लिखा है कि पंचायत चुनाव फर्जी हैं और पार्टियों की राजनीति बाजार में खरीदने-बेचने के लायक है।

By: Badal Dewangan

Published: 03 Jan 2020, 12:18 PM IST

जगदलपुर. माओवादियों ने पंचायत चुनाव का बहिष्कार किया है। उन्होंने इस संबंध में बैलाडीला-बचेली इलाके में कई जगहों पर बैनर टांगने के साथ ही पर्चे भी फेंके हैं। दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का उल्लेख बैनर में मिला है।

किसी भी जनप्रतिनिधि के नाम का उल्लेख नहीं किया गया
माओवादियों ने इन पर्चों में लिखा है कि पंचायत चुनाव फर्जी हैं और पार्टियों की राजनीति बाजार में खरीदने-बेचने के लायक है। जिन इलाकों में पर्चे बरामद हुए हैं। उसके आसपास माओवादियों का प्रभाव है। ऐसे में इनके बरामद होने से पंचायत चुनाव में माओवादी दहशत ने दस्तक दे दी है। पर्चे और बैनर में हर बार की तरह इस बार भी माओवादियों ने क्रांतिकारी जनताना सरकार की स्थापना की बात कही है। साथ ही उन्होंने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अपनी नाराजगी भी जाहिर की है। हालांकि किसी भी जनप्रतिनिधि के नाम का उल्लेख नहीं किया गया है।

दक्षिण बस्तर में चुनाव प्रभावित करने की रणनीति
माओवादियों की चुनाव पूर्व इस तरह के बैनर-पोस्टर और पर्चों के जरिए चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश रहती है। उनका प्रयास रहता है कि सुरक्षा बलों और जनप्रतिनिधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जाए। पूर्व में विस-लोस चुनाव के दौरान भी माओवादियों ने इसी तरह के पर्चे दंतेवाड़ा जिले के कई इलाकों में लगाए थे। पंचायत चुनाव सीधे गांवों की राजनीति से जुड़े हुए हैं। ऐसे में इन पोस्टरों के सामने आने से बैलाडीला व बचेली इलाके के जनप्रतिनिधियों में भय का माहौल है।

पर्चे फेंककर कोंटा इलाके में हुई मुठभेड़ों को बताया फर्जी
माओवादियों की दक्षिण बस्तर डिवीजन के अंतर्गत कोंटा एरिया कमेटी ने इलाके में पर्चे फेंककर कोटा क्षेत्र के बड़ेकेढ़वाल, छोटेकेढ़वाल और सिगानमगड़ू में हुई मुठभेंड़ों को फर्जी करार दिया है। कमेटी के सचिव मंगडू के हवाले से कहा गया है कि पुलिस वालों ने निर्दोष ग्रामीणों की हत्या की है। घर से उठाकर जंगलों में ले जाकर ग्रामीणों को मारा गया है। इस तरह के कृत्य पुलिस लगातार क्षेत्र में कर रही है। जिन ग्रामीणों की गिरफ्तारी हुई है। उसे भी गलत बताया गया है। माओवादियों ने मानवाधिकार और समाजसेवी संगठनों से मांग की है कि वे जांच समिति गठित कर मुठभेंड़ों और गिरफ्तारियों की जांच कर दोषी पुलिस वालों को दंड दिलवाएं और इसके खिलाफ जनआंदोलन खड़ा करें।

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