जानिए क्या सुविधाएं होनी चाहिए एक ट्रॉमा सेंटर में, जो शासन की स्वीकृति के बावजूद नहीं बन पाया इस मेडिकल कॉलेज में

ट्रामा सेंटर बनाने शासन ने 9 करोड़ रुपए की दी है स्वीकृति, सडक़ दुर्घटना में घायल गंभीर मरीजों को कर देते है रायपुर रेफर

By: Badal Dewangan

Published: 18 Feb 2020, 11:24 AM IST

जगदलपुर. बड़े हादसे या दुर्घटना होने पर बस्तर के सरकारी अस्पताल ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार नहीं है। यहां पर मेडिकल कॉलेज शुरू हुए करीब आठ साल हो गए। इसके बाद भी अस्पताल में ट्रामा सेंटर की सुविधाएं अब तक नहीं मिल पाई हैं। वहीं मेकाज में ट्रामा सेंटर शुरू करने शासन से करीब ९ करोड़ रुपए की स्वीकृति भी मिल गई है। बावजूद मेकाज प्रबंधन ट्रामा सेंटर शुरू करने के लिए कोई पहल नहीं कर रहा है, जो गंभीर मरीजों के लिए आफत बन गया है।

हालत गंभीर होने के बावजूद 300 किमी दूर कर देते हैं रेफर
करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद मेडिकल कॉलेज गंभीर मरीजों के लिए सिर्फ रेफर सेंटर बनकर रह गई है। मेडिकल कॉलेज में पूरे बस्तर संभाग के अस्पताल से गंभीर मरीजों को रेफर किया जाता है। बावजूद यहां पर इलाज की सुविधा नहीं है। सडक़ दुर्घटना या किसी अन्य हादसे में घायल मरीजों के लिए जगदलपुर से रायपुर की दूरी ३०० किमी. है। ऐसे में मरीजों को रायपुर पहुंचने में ६ से ७ घंटे लग जाता है। इससे गंभीर मरीजों की बीच रास्ते में ही मौत हो जाती है।

विशेषज्ञ डॉक्टर, न ही आधुनिक जांच मशीनें
मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ डॉक्टर है और न ही आधुनिक जांच मशीनें है। यहां पर सिर्फ ईसीजी, डायलिसिस, एक्स-रे व सीटी स्कैन मशीन की सुविधा है, पर जांच के लिए रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं है। वहीं कई विभागों में स्पेशलिस्ट डॉक्टर तक नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को हायर सेटर रेफर करने के अलावा कोई उपाय नहीं है।

यह है ट्रामा सेंटर की फेसिलिटी
हादसों में गंभीर रूप से घायल हेड इंज्युरी, फ्रैक्चर और जले हुए मरीजों को तत्काल इलाज मुहिया कराने के लिए ट्रामा सेंटर की जरूरत होती है। एमसीआई (मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया) ने ट्रामा सर्विस को एक स्पेशिलिटी सर्विस के रूप में मान्य किया है। इसमें एक ही छत के नींच आर्थोपेडिक, न्यूरोसर्जरी, बर्न, कार्डियक और प्लास्टिक सर्जरी जैसे एक्सपर्ट डॉक्टर और डायग्नोसिस फेसिलिटी की सुविधा होती है।

यह है ट्रामा सेंटर की गाइड लाइन
ट्रामा सेंटर में मेडिसिन, सर्जरी, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, आर्थोपेडिक्स, डेंटिस्ट्री, रेडियोलॉजी, एनीस्थिसिया विशेषज्ञ डॉक्टर होना चाहिए। साथ ही वर्किंग ऑपरेशन थिएटर, क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट, ट्रांसपोर्टेवल वेंटीलेटर, सीटी स्कैन, ब्लड स्टोरेज यूनिट, पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे मशीन, सेंट्रल ऑक्सीजन लाइन, पैथोलॉजी, ईको कार्डियोग्राफी व ईसीजी जांच की मशीन होनी चाहिए।

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