SDM करेंगे दो किसानों को जेल भेजने के मामले की जांच, रिहाई के लिए प्रशासन ने उपलब्ध कराया वकील

SDM करेंगे दो किसानों को जेल भेजने के मामले की जांच, रिहाई के लिए प्रशासन ने उपलब्ध कराया वकील

Akanksha Agrawal | Publish: May, 16 2019 09:07:09 AM (IST) | Updated: May, 16 2019 09:08:56 AM (IST) Jagdalpur, Jagdalpur, Chhattisgarh, India

बैंक का कर्ज (Bank Loan) नहीं चुका पाने पर दो आदिवासी किसानों (Tribal Farmers) को जेल भेज देने के मामले में प्रशासन हरकत में आ गई है। बस्तर कलेक्टर (Bastar Collector) ने खुद SDM को इस मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। ज्ञात हो कि भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) का कर्ज नहीं लौटा पाने पर दो आदिवासी किसानों (Tribal Farmers) को जेल भेज दिया गया है।

रायपुर/जगदलपुर. बैंक का कर्ज (Bank Loan) नहीं चुका पाने वाले किसानों (Farmers) को जेल भेजने का मामला पत्रिका में 15 मई को प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार (Chhattisgarh Government) और प्रशासन हरकत में आए। बस्तर कलक्टर (Bastar Collector) डॉ. अय्याज तंबोली ने एसडीएम जी.आर. मरकाम को मामले की जांच का जिम्मा सौंपा है। प्रशासन इसे किसानों के साथ हुई धोखाधड़ी का मामला बता रहा है।

इधर पुलिस महानिदेशक डी.एम. अवस्थी ने जगदलपुर (Jagdalpur) के पुलिस अधीक्षक डी. श्रवण को किसानों से धोखाधड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। किसानों को जमानत पर जेल से बाहर निकालने की कोशिशें भी शुरू हो चुकी हैं।

प्रशासन ने जेल में बंद दोनों किसानों सुखदास और तुलाराम को नि:शुल्क वकील भी उपलब्ध करा दिया है। जगदलपुर की भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) कृषि विकास शाखा के परिवाद के आधार पर प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी ने दोनों किसानों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया था।

बैंक की भूमिका भी जांच में
एसडीएम (SDM) की जांच के दायरे में एसबीआई (SBI) एडीबी शाखा (ADB Branch) की भूमिका भी है। बताया जा रहा है कि इस मामले में बैंक, दलालों और कर्ज को मंजूरी देने से संबंधित दूसरे लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है। परिजनों के मुताबिक गांव के ही दो व्यक्तियों ने किसानों (Farmers) से सस्ता कर्ज दिलाने के नाम पर कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए थे।

एसडीएम ने की परिजनों से बात
जांच अधिकारी के सामने हुए परिजनों के बयान से मामला धोखाधड़ी का लगता है। बताया जा रहा है कि तुलाराम मौर्य के नाम पर 16 नवम्बर 2009 को भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) की कृषि विकास शाखा (एसबीआई एडीबी) से किसान क्रेडिट कार्ड पर 3 लाख, ड्रिप के लिए 2 लाख 3 हजार रुपए और फेंसिंग के लिए 60 हजार रुपए का कर्ज लिया था। ऐसा ही मामला सुखदास का भी था।

 

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