जेल भेजी गई दो महिलाएं अपने ही बच्चों को बेचने की तैयारी में थी, एसआईटी ने 24 घंटे में ढूंढ निकाले 3 बच्चे

एसआईटी ने 24 घंटे के अंदर दर्जनभर से ज्यादा ठिकानों पर दबिश देकर उन चार बच्चों को बरामद किया जिनकी तस्वीर दिखाकर बच्चों की खरीदी-बिक्री को अंजाम दिया जा रहा था।

By: Badal Dewangan

Updated: 19 Mar 2020, 11:17 AM IST

जगदलपुर. क्या इंसानों को भी खरीदा और बेचा जा सकता है? क्या यह सही है या गलत? इसी तरह के सवाल पिछले तीन दिनों से शहर के लोगों के बीच सुनाई दे रहे हैं। ‘पत्रिका’ ने दुधमुंहे बच्चों के खरीद-फरोख्त का खुलासा किया तो शहर में हडक़ंप मच गया। एसपी दीपक झा ने मामले में तत्परता दिखाते हुए पहले तो पिंक स्क्वाड के जरिए रैकेट को पकड़वाया उसके बाद इस गिरोह की तह तक जाने ५ सदस्यीय एसआईटी बना डाली। इसी एसआईटी ने २४ घंटे के अंदर दर्जनभर से ज्यादा ठिकानों पर दबिश देकर उन चार बच्चों को बरामद किया जिनकी तस्वीर दिखाकर बच्चों की खरीदी-बिक्री को अंजाम दिया जा रहा था। तस्वीर ५ बच्चों की दिखाई गई थी इनमें से तीनों दुधमुंहे मासूम आरोपियों के ही हैं। यह चौंकाने वाला खुलासा एसआईटी के चीफ और एसडीओपी भानपुरी उदयन बेहार ने बुधवार को किया। उन्होंने बताया कि तीनों बच्चे अटल अवास स्थित आरोपियों के निवास से बरामद किए गए हैं।

मुकबधिर महिला के बच्चे का पिता कौन इसकी भी होगी जांच
चपका में आरोपियों के हाथ से बरामद हुई बच्ची को नयापारा स्थित सीडब्लूसी होम में रखा गया है। जिसकी मां मुकबधिर होने की वजह से पुलिस उसका बयान नहीं ले पा रही है। इसके चलते इस बच्ची का पिता कौन है यह पता नहीं चल पा रहा है। एसपी ने मुक बधिर महिला का बयान दर्ज करवाने एसआइटी को एक्सपर्ट की मदद लेने निर्देश दिए है।

आरोपियों से डेढ़ साल पहले बच्ची लेने वाला दंपति पहुंचा थाने
पत्रिका में इस रैकेट का पर्दाफाश होने के बाद आरोपियों की पहचान होने पर शहर का एक दंपति कोतवाली थाने पहुंचा और बताया कि उन्होंने इसी गिरोह के माध्यम से डेढ़ साल पहले एक बच्ची ८० हजार रुपए में खरीदी थी। दोनों निसंतान थे। इसी का फायदा उठाकर आरोपी उन तक पहुंचे। उन्हें १० वर्षों से बच्चा नहीं था। आरोपियों ने उन्हें बताया था कि राजस्थान की एक अविवाहिता युवती की बच्ची है, जो इस बच्ची को नहीं रखना चाहती थी। इस खुलासे से भी पुलिस की जांच को एक नया एंगल मिल गया है। एसआईटी चीफ ने कहा कि अब हम इस रैकेट के अंतर्राज्यीय गिरोह से जुड़े होने की भी जांच कर रहे हैं। पुलिस ने बयान दर्ज कर फिलहाल दंपति को छोड़ दिया है।

पुलिस को तलाशने हैं इन सवालों के जवाब
-क्या यह बड़े नेटवर्क का एक छोटा सा हिस्सा है ?
-क्या यह अंतराज्यीय गिरोह का हिस्सा है ?
-इस पूरे रैकेट की मॉनिटरिंग कौन कर रहा है?
-बच्चे आखिर आ कहां से रहे हैं?

एसआईटी ने बच्चों के रेस्क्यू पर पहले किया पूरा फोकस
व्हाट्सअप में यासिर आलम को कुल ६ बच्चों की तस्वीर भेजी गई थी। जिसमें से दिव्यांग बच्चे को मानसिक रूप से विक्षिप्त मां ने जन्म दिया था और दूसरी बच्ची को मुकबधिर मां ने जन्म दिया था। इस मुकबधिर मां की बच्ची को ही चपका में पुलिस और पत्रिका की संयुक्त टीम ने स्टिंग करते हुए आरोपियों के चंगुल से छुड़ाने के बाद सीडब्लूसी के हवाले किया था। पुलिस की अब तक की कार्रवाई में यह बात स्पष्ट हुई है कि उसने पहले बच्चों के रेस्क्यू को प्राथमिकता दी। इसी से कई खुलासे भी हुए ।

आरोपियों का मोबाइल बताएगा कि किन तक पहुंचा था रैकेट
नवजात बच्चों के खरीद-फरोक्त में अभी तक यही समझा जा रहा था कि यह एक ही बच्चे का मामला है, लेकिन जिस तरह से एक के बाद एक बच्चे बरामद होते जा रहे हैं। इससे समझा जा सकता है कि यह रैकेट लंबे समय से चल रहा है। पुलिस का साइबर सेल आरोपी साइना, आशिया, रूखसार और संगीता तिवारी के मोबाइल को अपने कब्जे में लेकर इसके सारे रिकॉर्ड खंगाल रहा है। इसी के जरिए उन तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है जो इस रैकेट के जरिए बच्चे खरीदने वाले थे।

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