scriptTears of family spilled after seeing children taking doctor's degree | बच्चों को डॉक्टर की डिग्री लेता देख छलके परिजनों के आंसू | Patrika News

बच्चों को डॉक्टर की डिग्री लेता देख छलके परिजनों के आंसू

मेडिकल कॉलेज में हुआ वर्ष 2016 के एमबीबीएस बच्चो का दीक्षांत समारोह, 2016 बैच के 75 स्टूडेंट्स के साथ ही उनके परिजनों के लिए भी काफी खास, मेकाज में यह पहला मौका है जब किसी बैच के लिए यह कार्यक्रम आयोजित

जगदलपुर

Published: May 12, 2022 12:23:43 pm

जगदलपुर . बुधवार को मेडिकल कालेज डिमरापाल के ऑडिटोरियम में दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया, यह दिन 2016 बैच के 75 स्टूडेंट्स के साथ ही उनके परिजनों के लिए भी काफी खास था, क्योंकि छात्रों को डिग्री लेता देख उनके परिजनों के आखों में भी आंसू आ गए, मेकाज में यह पहला मौका है जब किसी बैच के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था, इस कार्यक्रम को भी छात्रों ने अपने खर्च से कराया था, इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बस्तर कलेक्टर रजत बंसल के साथ ही मेकाज अधीक्षक डॉ टीकू सिन्हा, मेडिसिन एचओडी डॉ नवीन दुल्हानी के अलावा अन्य डॉक्टर मौजूद थे।
मेकाज में यह पहला मौका है जब किसी बैच के लिए यह कार्यक्रम आयोजित
मेकाज में यह पहला मौका है जब किसी बैच के लिए यह कार्यक्रम आयोजित
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बस्तर कलेक्टर रजत बंसल ने अपने उदबोधन में कहा कि कोविड के दौरान देखा गया कि 7 जिलों के अलावा ओडिसा व तेलंगाना की ओर से आये मरीजों के इलाज में डॉक्टरों के साथ ही स्टूडेंट्स द्वारा अपनी पूरी मेहनत और लगन के साथ काम किया, अक्सर देखा जाता है कि हमारे दिमाग मे जो चलता है उसमें हम हमेशा हीरो रहते है, लेकिन दूसरे के दिमाग मे हमारा रोल हमेशा विलेन का रहता है, उसका सबसे बड़ा कारण है कि जब जीवन मे बड़ी चुनौती आती है उस समय हम किस प्रकार से उसे संभालते है, जैसे किसी के इलाज के दौरान कोई गाली गलौज के अलावा दुर्व्यवहार किया जाता है, तो उसे कैसे संभालते है उससे सेवा भाव का पता चलता है, अब तो यह भी देखा जा रहा है रायपुर के बाद मेकाज में एमबीबीएस के लिए बच्चे रुचि ले रहे है, वही अधीक्षक डॉ टीकू सिन्हा का कहना है कि 2006 में इस मेडिकल कॉलेज का उदघाटन हुआ था, यह पहला मौका है कि जब 2016 बैच का शपत ग्रहण समारोह किया जा रहा है, इस शुरुआत के साथ ही अब यह निरतंर चलता रहेगा, 2016 बैच के बच्चो पर गर्व हो रहा है।
क्योंकि इन बच्चो ने कोविड में जी जान लगाकर सेवा की, ये हमारे सच्चे सिपाही है, कोविड में भी रिकवरी रेट अच्छा था।

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