इस हद तक भी हो सकते है फर्जीवाड़े और घूसखोरी, खबर पढ़ आप भी कहेगें कैसे कर दिया ओडीएफ

इस हद तक भी हो सकते है फर्जीवाड़े और घूसखोरी, खबर पढ़ आप भी कहेगें कैसे कर दिया ओडीएफ

Badal Dewangan | Publish: Jun, 15 2019 03:51:47 PM (IST) Jagdalpur, Jagdalpur, Chhattisgarh, India

फर्जीवाड़ा फूटा: लोगों को न प्रोत्साहन राशि मिली और न शौचालय(odf Toilet) हुए पूर्ण, जिला प्रशासन ने फर्जी सूची दिखाकर गांव को घोषित करवा दिया ओडीएफ(odf)

कोण्डागांव/बड़ेकनेरा . फर्जी सूची दिखाकर ग्राम पंचायत को ओडीएफ (odf) घोषित करवाने का मामला सामने आया हैं। दरअसल ग्राम पंचायत बड़ेबंद्री में पंचायत प्रतिनिधियों व तत्कालीन सचिव ने मिलकर पंचायत में शौचालय निर्माण के बगैर ही यहां के हितग्राहीयों की सूची दिखाते हुए पंचायत को तो साल पहले ही ओडीएफ (odf) घोषित तो करवा दिया और जिला प्रशासन से वाहवाही बटोर ली। लेकिन हकीकत इससे विपरीत है यहां आज भी आधे से ज्यादा शौचालय(Toilet) आधे-अधूरे पड़े है वहीं जिन लोगों ने अपने पैसे लगाकर शौचालय (toilet) का निर्माण करवाया है वो लोग अब अपनी लागत व प्रोत्साहन राशि के लिए पंचायत से लेकर जनपद तक के चक्कर कांट रहे हैं। लेकिन उन्हें कोई तव्वजों नहीं मिल रहा

निर्माण की गति थमनी शुरू हो गई
दरअसल केंद्र सरकार की महत्ती योजनाओं में से एक स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत इस पंचायत में भी शौचालयों (Toilets) का निर्माण करने सर्वे आदि करने के बाद निर्माण शुरू हुआ और कुछ हितग्राहीयों के घरों में बकायदा पूर्ण निर्माण भी करवाया गया, लेकिन धीरे-धीरे इसके निर्माण की गति थमनी शुरू हो गई और जो आज तक पूर्ण नहीं हो पाया हैं, लेकिन शासन-प्रशासन (Administration) के प्रेशर में आकर कहे या फिर गड़बडझाला करते हुए पंचायत को ओडीएफ (odf) का प्रमाणपत्र जारी करवा लिया।

कहीं केवल दीवार खड़ी तो कहीं टंकी पड़ी है खुली
जानकारी के मुताबिक पंचायत में 600 से ज्यादा शौचालय (toilet) का निर्माण किया जाना था। लेकिन यहां कुछ ही बन पाए है और तो कुछ आधे-अधूरे ही हैं। किसी में दरवाजा नहीं तो किसी हितग्राही के यहां केवल शौचालय के दीवार खड़ी छोड़ दी गई हैं। यदि कहीं दीवार व सीट पर फैक्ट है तो टंकी में ढक्कन नहीं लगा पाए हैं। वहीं एक दर्जन से ज्यादा ऐसे हितग्राही है जिन्होंने अपने पैसे खर्चकर शौचालयों का निर्माण लेकिन उनको आज तक पैसा नहीं मिला वे अब अपनी इस शिकायत को लेकर कलक्टर से मिलने की बात कह रहे हैं। ऐसे में कैसे होगा शौचमुक्त भारत का सपना पूरा यहॉ तो प्राथमिक स्तर पर ही गड़़बड़ी देखने को मिल रही हैं।

मुझे इसकी शिकायत मिली हैं, जिन हितग्राहीयों को पैसा नहीं मिला है इसके लिए सचिव को निर्देशित किया गया हैं।
डिगेश पटेल, सीईओ जपं

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