75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा समाप्त, निभाई गई ये आखिरी रस्म, 550 से अधिक देवी देवता पर्व में हुए थे शामिल

75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा समाप्त, निभाई गई ये आखिरी रस्म, 550 से अधिक देवी देवता पर्व में हुए थे शामिल
75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा समाप्त, निभाई गई ये आखिरी रस्म, 550 से अधिक देवी देवता पर्व में हुए थे शामिल

Badal Dewangan | Updated: 12 Oct 2019, 03:16:57 PM (IST) Jagdalpur, Jagdalpur, Chhattisgarh, India

मावली परघाव में जिस तरह खुशी से माता दंतेश्वरी का स्वागत किया गया था, उसी तरह उदास मन से बस्तर दशहरा के आखिरी दिन उन्हें विदा किया जाता है

जगदलपुर . दशहरा पर्व के समापन से पहले बस्तर के सभी देवी-देवता कुटुंब जात्रा विधान के तहत एक साथ एक स्थान पर एकत्र हुए। शुक्रवार को गंगामुंडा में आयोजित जात्रा में देवी देवाताओं का विदाई समारोह आयोजित किया गया। पूजा विधान के बाद माई दंतेश्वरी ने अलग-अलग इलाकों से आए देवी-देवताओं को विदाई दी। इस बार दशहरा पर्व में 550 से अधिक देवी-देवता पहुंचे थे।

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एक-एक देवी और देवताओं को ससम्मान विदाई दी गई
शनिवार सुबह से ही गंगामुंडा में देवी-देवताओं का आना शुरू हो गया था। दोपहर तक सभी देवता जमा हुए। फिर कुटुंब जात्रा विधान की शुरुआत हुई। इसके बाद विदाई का सिलसिला शुरू हुआ। एक-एक देवी और देवताओं को ससम्मान विदाई दी गई। इस जात्रा में शामिल होने के लिए राजपरिवार के लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी शामिल हुए।

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देवी-देवता और पुजारियों को दिया गया भेंट
बस्तर दशहरा में परंपरा अनुसार पर्व में शामिल होने वाले देवी-देवाताओं और पुजारियो को विदाई के दौरान भेंट दिया गया। सालों से यह परंपरा चली आ रही है। बड़े देवी-देवताओं को बकरा तो छोटों को नारियल और पुजारियों को कपड़ा दिया गया।

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आज माईजी जाएंगी दंतेवाड़ा
बस्तर दशहरा का समापन शनिवार सुबह ११ बजे माईजी को विदाई देकर होगी। लगभग एक सप्ताह तक जगदलपुर में रहने के बाद दंतेवाड़ा के लिए उन्हें विदा किया जाएगा। जिस भव्यता के साथ मावली परघाव में माता का स्वागत किया जाता है उसी भव्यता के साथ ही विदाई भी दी जाएगी। मंच छत्र और डोली को फूलों से सजाया जाएगा। दंतेवाड़ा और जगदलपुर के दंतेश्वरी मंदिर के प्रमुख पुजारी, राजपविार, राजपुरोहित, राजगुुरु, जनप्रतिनिधि व अधिकारी मौजूद रहेंगे।

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