बीपीएस में तालाबंदी से बाहरी ट्रकों की है चांदी चांदी, जाने क्या है असली कारण

ajay shrivastav

Publish: Sep, 17 2017 12:52:04 (IST)

Jagdalpur, Chhattisgarh, India
बीपीएस में तालाबंदी से बाहरी ट्रकों की है चांदी चांदी, जाने क्या है असली कारण

ट्रक से लौह अयस्क की ढुलाई का भाड़ा ठेकेदार ने 1210 रुपए से घटाकर 1100 रुपए कर दिया है। वाहन में माल भरने की सीमा भी 16 से 18 टन के बीच कर दी गई है।

जगदलपुर. बस्तर परिवहन संघ के चार माह से निलंबित होने का साइड इफेक्ट अब ट्रांसपोर्टरों पर चौतरफा मार के रूप में सामने आ रहा है। जगदलपुर से रायपुर तक ट्रक से लौह अयस्क की ढुलाई का भाड़ा ठेकेदार ने 1210 रुपए से घटाकर 1100 रुपए कर दिया है। इतना ही नहीं वाहन में माल भरने की सीमा भी 16 से 18 टन के बीच कर दी गई है।

1210 रुपए से 1100 रुपए कर दिया गया है
शनिवार को धरमपुरा रोड़ पर खड़े वाहन चालक धनसिंह नायक ने बताया कि बस्तर परिवहन संघ में तालाबंदी से वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। कभी लौह अयस्क ढुलाई भी करना पड़ा तो पहले की तरह पासिंग न मिलती है और न भाड़ा। उन्होंने बताया कि पहले हर ट्रक को 18 टन माल मिलता था, लेकिन अब वाहन का भार के साथ 25 टन से अधिक की पासिंग नहीं मिलती। उनकी दोनों गाडि़यां 9 टन की हैं, इसलिए वे केवल 16 टन माल ही भर सकते हैं। एक तो कम माल लेकर गाड़ी रायपुर जाती है, वहीं दूसरी तरफ इसकी कीमत भी 1210 रुपए से 1100 रुपए कर दिया गया है। वापसी के समय भी 700 से 750 रुपए प्रति टन की कीमत ही मिल पाती है, जो पहले 1000 रुपए टन था।

माह में तीन ट्रिप, लोन दें या परिवार पाले
ट्रक संचालकों का कहना है कि एक माह में किसी की भी ट्रक को तीन से अधिक बार ढुलाई के लिए लौह अयस्क नहीं मिलता। दूसरी तरफ रायपुर व अन्य क्षेत्रों से वापसी में माल भरने के लिए पांच से छह दिन का इंतजार करना पडता है। एेसे में भाड़े का पैसा बचाएं, परिवार पाले या लोन कमा करे। चार माह से ट्रक मालिकों के परिवार पालना मुश्किल हो रहा है।

बहाली के आदेश से जगी आस
मनोहर ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि कोर्ट ने बीपीएस के पक्ष में फैसला सुनाया है, लेकिन पहले की तरह ट्रक चलेंगे, इसे लेकर शंका बरकरार है। उनका मानना है कि इस चार माह में काफी कुछ बदल गया है। प्रशासन की कार्रवाई के बाद उनके मन में तालाबंदी को लेकर भय है ।

80 फीसदी सदस्यों के पास एक ट्रक
बस्तर परिवहन संघ से जुड़े सदस्यों में 80 प्रतिशत सदस्यों के पास एक ट्रक है। इनमें से अधिकतर वे है जो पहले ड्राइवर थे और मालिक से वाहन को रिफाइनेंस करवाया है। अब जबकि ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र का हाल बस्तर में खराब चल रहा है, सभी की कमर टूट गई है। कई ने पिछले तीन माह से किश्त ही जमा नहीं की है। ऐसे में उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

बाहरी वाहनों की चांदी
प्रशासनिक कार्रवाई के बाद सबसे अधिक लाभ बाहरी ट्रांसपोर्टरों को हुआ है। इसकी वजह यह है कि उन्हें यहां माल भरने के लिए किसी से परमिशन नहीं लेनी पड़ती। वहीं अच्छे दाम पर वापसी का माल भी मिल जाता है। संघ के न होने पर स्थानीय ट्रांसपोर्टरों को माल भरने की प्राथमिकता भी खत्म हो गई।

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