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देश के 736 बांधों की मरम्मत को चाहिए 10 हजार करोड़

चम्बल पर बने बांध हर साल करोड़ों की कमाई करके सरकार को दे रहे हैं। सबसे सस्ती बिजली पानी से ही बन रही है, लेकिन इसके विपरीत इन बांधों की मरम्मत व रखरखाव के लिए ऊंट के मुंह में जीरे के समान राशि मिलती है। विभाग के पास न पर्याप्त तकनीकी स्टाफ है, न अन्य कर्मचारी हैं। हालांकि विभाग के अधिकारियों के अनुसार बांधों की सुरक्षा को लेकर कोई खतरा नहीं है, लेकिन पुराने बांधों की समय-समय पर मरम्मत की आवश्यकता है।

जयपुर

Published: June 13, 2022 09:51:32 pm

चम्बल पर बने बांध हर साल करोड़ों की कमाई करके सरकार को दे रहे हैं। सबसे सस्ती बिजली पानी से ही बन रही है, लेकिन इसके विपरीत इन बांधों की मरम्मत व रखरखाव के लिए ऊंट के मुंह में जीरे के समान राशि मिलती है। विभाग के पास न पर्याप्त तकनीकी स्टाफ है, न अन्य कर्मचारी हैं। हालांकि विभाग के अधिकारियों के अनुसार बांधों की सुरक्षा को लेकर कोई खतरा नहीं है, लेकिन पुराने बांधों की समय-समय पर मरम्मत की आवश्यकता है।

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देश के सात राज्यों के 736 बांधों की मरम्मत के लिए 10 हजार 211 करोड़ रुपए की जरूरत है। राजस्थान के 189 बांधों के लिए 965 करोड़ की जरूरत है, राज्य में 22 प्रमुख बड़े बांध हैं और 278 अन्य बांध हैं। इनके अलावा भी अनेक छोटे बांध हैं। बांधों की सुरक्षा और कार्य निष्पादकता में सुधार के लिए केन्द्र सरकार ने अप्रेल 2012 से मार्च 2021 तक विश्व बैंक के वित्तीय सहयोग से बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना पूरी की है।

इस कार्यक्रम के तहत 7 राज्यों के 223 मौजूदा बांधों पर 2567 करोड़ रुपए व्यय करके रख रखाव के कार्य कराए। पहला चरण पूरा होने के बाद अब दूसरे और तीसरे चरण की 10 हजार 211 करोड़ की लागत से 19 राज्यों के 736 बांधों के पुनर्वासन की योजना तैयार की गई है। यह योजना 10 साल में पूरी होगी। अधिकतर बांध राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। चम्बल नदी पर बने बांध 50 साल से ज्यादा पुराने हैं। चम्बल नदी पर कोटा बैराज का निर्माण 1960 में और राणाप्रताप सागर का निर्माण 1970 में पूरा हुआ। वहीं जवाहर सागर का निर्माण 1972 में पूरा हुआ।

बांधों की सुरक्षा के लिए यह भी प्रावधान

केन्द्र सरकार ने बांधों की उचित निगरानी, निरीक्षण, संचालन और रख रखाव के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 बनाया है, जो 30 दिसम्बर 2021 से प्रभावी है। इस अधिनियम का उद्देश्य बांध की विफलता से संबंधित आपदाओं को रोकना और उनके सुरक्षित कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत तंत्र प्रदान करना है। राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण भी बांधों की सुरक्षा के लिए कार्य करते हैं।

चम्बल नदी पर बने बांधों को सुरक्षा की दृष्टि से कोई खतरा नहीं है। रख रखाव नियमित प्रक्रिया है। विश्व बैंक के सहयोग से मरम्मत संबंधित कार्य कराए जाएंगे। केन्द्र की टीम एक बार मौका निरीक्षण कर चुकी है।

- राजेन्द्र पारीक, मुख्य अभियंता, जल संसाधन, कोटा


देश के बांधों की स्थिति

राज्य बांधों की अनुमानित संख्या खर्च

आंध्रप्रदेश 31 667

छत्तीसगढ़ 5 133

गोवा 2 58

गुजरात 6 400

झारखंड 35 238

कनार्टक 41 612

केरल 28 316

मध्यप्रदेश 27 186

महाराष्ट्र 167 940

मणिपुर 2 311

मेघालय 6 441

राज्य बांध खर्च

ओडिशा 36 804

पंजाब 12 442

राजस्थान 189 965

तमिलनाडु 59 1064

तेलंगाना 29 545

उत्तरप्रदेश 39 787

उत्तराखंड 6 274

प. बंगाल 9 84

बीबीएमबी 2 230

डीवीसी 5 144

सीडब्ल्यूसी - 570

कुल 736 10,211

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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी (@aanandmani) राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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