12 साल की रेप पीड़िता ने दिया बच्ची को जन्म, अब मासूम बच्ची को नहीं मिल रहा मां बाप का नाम

दो जिंदगियां दांव पर, मां खुद नाबालिग कैसे ले बेटी की जिम्मेदारी?, न जन्म प्रमाण पत्र बन पा रहा, न स्कूल में दाखिला मिल रहा, साढ़े तीन साल पहले 12 साल की बालिका से पड़ोसी नाबालिग बालक ने किया था दुष्कर्म, बालिका ने दिया था बच्ची को जन्म, बालिका की मां ने अपना नाम देने का लिया था जिम्मा

जयपुर. बलात्कार ने तो केवल उस समय ही पीड़ा दी थी, समाज और प्रशासन तो हर दिन दु:ख दे रहा है। न केवल पीडि़त बालिका को, बल्कि दुष्कर्म के बाद जन्मी नन्ही मासूम को भी। तीन साल की अबोध बच्ची अपनी मां को नहीं बल्कि अपनी नानी को मां बोलती है। क्यूं न बोले, नानी ने ही तो जन्म के समय उसे अपना नाम देने के घोषणा की थी। लेकिन, बच्ची को कानूनी रुप से कैसे अपना नाम दिया जाना है, यह वह न समझ पाई। जब नन्ही मासूम स्कूल जाने लायक हुई तो दस्तावेज ही नहीं बन सके। जन्म प्रमाण पत्र बनवाने गईं तो कोई पिता का नाम पूछता तो कोई नाबालिग मां का। नानी इस पशोपेश में है कि मासूम के जन्म प्रमाण पत्र में बेटी का नाम आ गया तो फिर उससे कौन शादी करेगा? पहले ही नाते-रिश्तेदार बेटी को दोयम दर्जे पर देख रहे हैं।

यूं बताई अपनी कहानी

साल 2016 में 12 साल की नाबालिग लड़की के साथ उसी मकान किराए पर रहने वाले एक नाबालिग किशोर ने दुष्कर्म किया। लड़की अपनी मां को बता पाती, उससे पहले वह गर्भवती हो गई। परिवार की मुखिया मां को जब पता चला तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गर्भपात संभव नहीं था, सो लड़की ने बच्ची को जन्म दिया। नातिन के जन्म के समय ही नानी कह दिया था कि वह उसे अपना नाम देगी। समय बीता तो परिवार को लोग भूल गए। मां-बेटी ने सिलाई व दूसरे काम करके अपना परिवार को पालने में लग गई। मासूम बच्ची तीन साल की हुई तो स्कूल में दाखिला करवाने लेकर गए। वहां जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड मांगे। इसके बाद शुरू हुई सरकारी सिस्टम से लड़ाई। प्रमाण पत्र बनवाने नगर निगम गए तो वहां पिता का नाम पूछा जाने लगा। कई चक्कर काटने के बाद भी प्रमाण पत्र नहीं बना। दो महीने बाद बच्ची चार साल की हो जाएगी। दस्तावेज नहीं बने तो इस साल भी उसका दाखिला नहीं हो पाएगा।

एकमुश्त डेढ़ लाख सहायता राशि ही मिली

किशोरी की मां ने बताया कि सरकार से तो घटना के समय एकमुश्त ही डेढ़ लाख रुपए की सहायता राशि मिली थी। वहीं, आरोपी लड़के को किशोर गृह में ले गए थे। उसके बाद न कोई पूछने आया और न ही सहायता करने। महिला ने बताया कि यह भी सुनने में आया है कि लड़का किशोर गृह से छूट गया है। सहायता राशि के जो पैसे मिले थे, वह भी खत्म हो गए। सरकार की ओर से कानूनी रुप से सलाह-मशविरा देने भी कोई नहीं आया।

pushpendra shekhawat Desk
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