वित्त आयोग की नसीहत, 'राजस्व घाटे में कमी को प्राथमिकता पर ले सरकार'

15वें वित्त आयोग की अर्थशास्त्रियों , उपभोक्ता संगठनों, पंचायत राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक, 9 सितंबर को मुख्यमंत्री और राज्य कैबिनेट के सदस्यों के साथ चर्चा करेगा आयोग

By: firoz shaifi

Published: 08 Sep 2019, 08:01 PM IST

जयपुर। 15वें वित्त आयोग ने अपने जयपुर दौरे के दूसरे दिन रविवार को अर्थशास्त्रियों, उपभोक्ता संगठनों, पंचायत राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर आर्थिक विकास से जुडे़ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। आयोग के अध्यक्ष एन के सिंह और सदस्यों ने अर्थ जगत से जुड़े विशेषज्ञों के साथ चर्चा के दौरान राजस्व घाटे में कमी करने को प्राथमिकता देने को कहा।

आयोग ने कहा कि आपात खर्चों को ध्यान में रखते हुए वित्तीय प्रबंधन को सावधानी पूर्वक व्यवस्थित करने की जरुरत है। साथ ही निजी निवेश बढ़ाने की जरूरत पर भी है। चर्चा के दौरान बिजली वितरण क्षेत्र में उदय योजना के मद्देनजर राज्य सरकार को हो रहे घाटे के मुद्दे पर भी बैठक में चर्चा की गई और कहा गया कि इस क्षेत्र में राज्य को खर्च और राजस्व घाटे के आकलन पर ध्यान देना चाहिए।


वित्त आयोग को अधिकारियों की ओर से बताया गया कि राजस्थान पानी की उपलब्धता और उसका वितरण प्राथमिकता वाला क्षेत्र है और गांवों तक पानी की आपूर्ति काफी खर्चीली है। इससे जल प्रबंधन कार्यक्रम प्रभावित होते हैं।

आयोग को बताया गया कि राज्य के रेगिस्तानी क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं को लागू करने में अधिक खर्च होता है लिहाजा जल प्रबंधन कार्यक्रमों के लिए धन के आवंटन में इस तथ्य को ध्यान में रखा जाना चाहिए। बैठक में वित्त आयोग से स्थानीय निकायों पर होने वाले खर्च को बढ़ाए जाने की मांग की गई।


10 निकायों के प्रतिनिधियों से भी की मुलाकात
वहीं अर्थशास्त्रियों और उपभोक्ता संगठनों की बैठक के बाद वित्त आयोग ने प्रदेश के 10 स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। बैठक में जयपुर और बीकानेर नगर निगम, गंगानगर, प्रतापगढ़ और सीकर नगर परिषद् तथा सुजानगढ़, निवाई, सांभर तथा केशोरायपाटन नगर पालिकाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

आयोग को बताया गया कि राज्य में स्थानीय शहरी निकायों को संविधान की 12 वीं अनुसूची के 18 में से 16 कार्य हस्तांतरित किए जा चुके हैं। स्थानीय निकायों को जल आपूर्ति का कार्य सौंपने की प्रक्रिया जारी है।

आयोग को बताया गया कि राज्य के मुख्य लेखा परीक्षक के अनुसार राजस्थान में शहरी स्थानीय निकायों के वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही में और सुधार की जरूरत है। पिछले वित वर्ष में 68 प्रतिशत निकायों के खातों को ही प्रमाणित किया जा सका है। इन निकायों में एक से अधिक बैंक खाते होने जैसी समस्याओं के कारण जवाबदेही और पारदर्शिता प्रभावित हो रही है।

इसके कारण स्थानीय निकायों के कोष में पिछले वर्ष जमा 1 हजार 652 करोड़ रूपए खर्च नहीं हो सके। बैठक में बताया गया कि राज्य में शहरी स्थानीय निकायों के आर्थिक निकायों के लिए लागू नेशलन म्यूनिसिपिल अकाउंट मैनुअल के तहत केवल 60 निकाय ही अपने खातों का संधारण कर रहे हैं।

वित आयोग ने इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखने का आश्वासन दिया था। आयोग 9 सितंबर को 5वां वित आयोग 9 सितम्बर को राज्य के मुख्यमंत्री, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी चर्चा करेगा।

firoz shaifi Desk
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