आपसी संघर्ष में दो बाघों की मौत, वहीं हमले में पांच ग्रामीणों की गई जान, फिर भी नहीं चेता विभाग

आपसी संघर्ष में दो बाघों की मौत, वहीं हमले में पांच ग्रामीणों की गई जान, फिर भी नहीं चेता विभाग

Deepshikha | Updated: 09 Oct 2019, 06:32:14 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

बाघों के इलाके में 177 गांव, 24 हजार परिवार और हर साल 5 लाख पर्यटक, बाघों के आपसी टकराव और ग्रामीणों पर हमले का बड़ा कारण-एनटीसीए और डब्ल्यूआइआइ के चेताने के बावजूद वन विभाग नहीं सुधरा

 

शादाब अहमद / जयपुर. रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों की घूमने की जगह पर करीब 24 हजार परिवार बसे हुए हैं और दिनभर सैकड़ों पर्यटक वाहनों में सैर-सपाटा करते हैं। ऐसे में इस टाइगर रिजर्व में बाघों के क्रिटिकल टाइगर हैबिटाट (सीटीएच) में व्यवधान अधिक बना रहने से बाघों का जंगल में सत्ता के लिए आपसी संघर्ष के साथ ग्रामीणों पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं। रणथंभौर में पिछले नौ महीनों के दौरान बाघों के आपसी संघर्ष में दो बाघों की मृत्यु हुई, जबकि हमले में पांच ग्रामीण भी अपना जान गंवा चुके हैं।

रणथंभौर में पर्यटन लगातार बढ़ रहा है। हर साल करीब पांच लाख से अधिक पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। इनमें से साथ ही वहां से गांव विस्थापित नहीं हो पा रहे हैं। इसके चलते ग्रामीणों की जनसंख्या भी लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में हालात यह है कि सीटीएच में करीब 65 गांव हैंए जहां 8 हजार परिवार रहते हैं। इनके पास करीब 80 हजार पशु भी बताए जाते हैं। इसके साथ ही सीटीएच परिधि से दो किलोमीटर से कम दूरी पर 112 गांव बसे हुए हैं। इनमें करीब 16 हजार परिवार और डेढ़ लाख से अधिक पशुधन है।

वहीं रणथंभौर में निरंतर बाघों की संख्या बढ़ रही है। खासतौर पर नर बाघों की संख्या अधिक होने से जंगल में सत्ता संघर्ष बढ़ता जा रहा है। जंगल में मानवीय हलचल के चलते बाघ जंगल के अंदर और यहां से बाहर जाकर ग्रामीणों पर हमले कर रहे हैं।
चेतावनी का वन विभाग पर असर नहीं

नेशनल टाइगर रिजर्व ऑथोरिटी (एनटीसीए) और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआइआइ) ने करीब ढाई महीने पहले बाघों को लेकर रिपोर्ट जारी की थी। इसमें उन्होंने बफर जोन को छोटा व बिखरा हुआ बताने के साथ सीटीएच में पर्यटकों के साथ लोगों की हलचल हद से अधिक बताते हुए इसे कम करने की सलाह दी थी। इसके बावजूद वन विभाग के रवैये में कोई सुधार नहीं आया।

-बाघों में संघर्ष

30 जनवरी-झंडाला में भिड़े, एक बाघ की मौत

16 मार्च-झूमर बावड़ी के पास संघर्ष, दोनों बाघ घायल

3 अप्रेल-जोन 4 में संघर्ष, एक बाघ घायल

29 सितंबर-भैरूपुरा में संघर्ष, एक बाघ की मौत


-बाघों के हमले में ग्रामीणों की मृत्यु

2 फरवरी
30 जून

12 सितंबर
21 सितंबर

7 अक्टूबर

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