वज्रपात: जयपुर के आमेर में 11 लोगों की मौत, राजस्थान के 6 जिलों में कुल 22 की जान गई

Rajasthan में लम्बे इन्तजार के बाद रविवार को मानसून सक्रिय तो हुआ लेकिन वज्रपात के साथ। छह जिलों में गिरी बिजली ने 22 लोगों की जान ले ली।

By: santosh

Updated: 12 Jul 2021, 08:32 AM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
जयपुर। राज्य में लम्बे इन्तजार के बाद रविवार को मानसून सक्रिय तो हुआ लेकिन वज्रपात के साथ। छह जिलों में गिरी बिजली ने 22 लोगों की जान ले ली। इनमें 11 लोगों की जान अकेले राजधानी के आमेर में गई। सोलह लोग घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। राज्य में आकाशीय बिजली गिरने की संभवत: यह सबसे बड़ी त्रासदी है।

आमेर में बिजली शाम 6.30 बजे महल के सामने 2000 फीट ऊंची पहाड़ी पर सिथत रियासतकालीन वॉच टावर पर गिरी। तब वहां भ्रमण पर पहुंचे बड़ी संख्या में युवा मौसम का लुत्फ उठा रहे थे। बिजली गिरी तो चीख-पुकार मच गई। गनीमत रही कि दो युवक बच गए, जो पहाड़ी से नीचे उतरकर मावठा स्टैंड पहुंचे और लोगों को सूचना दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दो पुलिसकर्मियों के साथ पहाड़ी पर स्थित वॉच टावर पहुंचे तो वहां हाहाकार मचा था। वॉच टावर की छतरी के नीचे, दीवार पर और नीचे पहाड़ी पर लोग पड़े थे।

घायल लोग बचाने के लिए चीख-पुकार रहे थे। दोनों पुलिसकर्मियों ने आमेर थानाधिकारी को फोन कर भयावहता बताई। इस बीच स्थानीय लोग बचाव कार्य में जुटे रहे। लोग घायलों को कंधों पर उठाकर नीचे लाए। इस बीच एम्बुलेंस नहीं पहुंची तो लोग आक्रोशित हो गए। सूचना के बाद पुलिस और सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंची लेकिन प्रशासन की ओर से बचाव कार्य में देर पर लोगों ने गुस्सा जताया। बाद में स्थानीय लोगों की मदद से सिविल डिफेंस, एसडीआरएफ की टीम घायलों और मृतकों को पहाड़ी से नीचे लाई।

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एम्बुलेंस नहीं, फिर गुस्साए लोग-
चीख-पुकार के बीच बचाव में जुटे लोग मृतकों और घायलों को कंधों पर उठाकर बड़ी मशक्कत से आमेर मावठा स्टैंड तक लाए। यहां उचित एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं दिखी तो आक्रोश फैल गया। लोगों ने पर्यटकों के नीचे वाहनों को रोककर उनमें घायलों और मृतकों को एसएमएस हॉस्पिटल भेजा। लोगों का आरोप था कि इतना बड़ा हादसा हो गया और प्रशासन की तरफ से दो-तीन एम्बुलेंस ही पहुंची।

खाई में गिरे लोग, अंधेरे में हुई परेशानी-
लोगों ने बताया कि वॉच टावर के दोनों तरफ पहाड़ी के बीच खाई है। कई लोग वहां कूद गए या हादसे के बाद गिर पड़े। खाई में गिरे हुए लोगों को अंधेरा होने के कारण बाहर निकालने में खासी मशक्कत करनी पड़ी।

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कमिश्नर और विधायक पहुंचे-
पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव, एडिशनल पुलिस कमिश्नर राहुल प्रकाश सहित अन्य अधिकारी और सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी, विधायक अमीन कागजी और रफीक खान भी वहां पहुंचे। तब जाकर बचाव कार्य में तेजी आई। रात करीब 10.30 बजे तक वॉच टावर पर फंसे सभी 27 लोगों को एसएमएस हॉस्पिटल पहुंचा दिया गया। वहां 11 को मृत घोषित किया गया।

देर रात फिर सर्च-
एसडीआरएफ की टीम ने रात करीब 10.30 बजे पुन: वॉच टावर के आस-पास पहाड़ी पर सर्च किया। यह अभियान खबर लिखने तक जारी रहा।

मृतक आश्रितों को 4-4 लाख की सहायता राशि-
आपदा प्रबंधन विभाग के प्रमुख सचिव आनंद कुमार ने बताया कि ऐसा हादसा राज्य में पहले न कभी देखा, न सुना। देश के अन्य किसी राज्य में भी ऐसा हादसा कभी ध्यान में नहीं आया। मृतकों को 4-4 लाख रुपए की सहायता एसडीआरएफ के नियमानुसार दी जाएगी।

बिजली गिरने से यहां इनकी मौत-
- धौलपुर: बाड़ी क्षेत्र के कुदिन्ना निवासी अमरसिंह का पुत्र लवकुश (15), रामवीर का पुत्र विपिन (10) और भोलू (8) पशुओं को चराने गांव से बाहर जंगल में गए थे। वहां दीवार के सहारे बैठे हुए थे। बिजली गिरने से तीनों की मौत हो गई।

- कोटा: कनवास क्षेत्र के गरड़ा का टांडा गांव के 9 बच्चे बकरियां चराने गए थे। बारिश से बचने के लिए सभी बच्चों ने बकरियों के साथ एक पेड़ के नीचे शरण ली। इस दौरान बिजली गिरने से पेड़ के नीचे बैठे अखराज (13), विक्रम (16), उर्जन (16) व बावला की मौत हो गई। अन्य 5 बच्चे गम्भीर रूप से झुलस गए।

- झालावाड़: खेत में काम कर रहे किसान ताराचंद भील (22) पर बिजली गिरी, मौत।

- बारां: केलवाड़ा क्षेत्र के बहराई ओड़ाखारा गांव में खेत पर जाते समय किसान पिता-पुत्र पर बिजली गिरी। पुत्र दीपक (20) की मौत। पिता लाल्या भील झुलस गया।

- टोंक: निवाई के टोरड़ी गांव में किसान बसराम गुर्जर (42) की मौत।

- जयपुर: बाड़ापदमपुरा आकोडिय़ा के बगरिया गांव की चांदा की ढाणी में कजोड़ मीणा के पुत्र गोलू (12) की मौत।

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