अब रद्द हो सकेंगे महंगी बिजली के 25 साल पुराने अनुबंध

बिजली खरीद अनुबंध (पावर परचेज एग्रीमेंट) की आड़ में उत्पादन कंपनियों से महंगी दर पर बिजली खरीदने का खेल अब नहीं चलेगा।

By: santosh

Published: 09 Apr 2021, 01:36 PM IST

भवनेश गुप्ता
जयपुर। बिजली खरीद अनुबंध (पावर परचेज एग्रीमेंट) की आड़ में उत्पादन कंपनियों से महंगी दर पर बिजली खरीदने का खेल अब नहीं चलेगा। विद्युत मंत्रालय ने ऐसे सभी 25 साल पुराने अनुबंध को रद्द करने की छूट दे दी है। अब बिजली वितरण कंपनियों पर इन विद्युत उत्पादन कंपनियों से न तो बिजली खरीद की बंदिश होगी और न ही अनुबंध बढ़ाने की जरूरत। हालांकि अंतिम निर्णय राज्य सरकार को लेना है।

ऊर्जा विभाग मंत्रालय की गाइडलाइन का अध्ययन करने का दावा कर रहा है। अभी तक अफसर कई मामलों में 25 साल पुराने प्लांट मामलों में बिजली खरीद अनुबंध को लगातार बढ़ाकर जनता और प्रकृति दोनों पर बोझ बढ़ाते रहे हैं। विद्युत उपभोक्ताओं पर बिजली दर बढ़ोतरी बोझ बढ़ने के पीछे एक कारण यह भी है। प्रमुख वित्त सचिव अखिल अरोड़ा भी पिछले दिनों हुई बैठक में कह चुके हैं कि महंगी बिजली खरीद वाले पावर परचेज एग्रीमेंट मामले में पुनर्विचार होना चाहिए।

उधर, पिछले दो वर्ष में बिजली वितरण कंपनियों ने राज्य के दो पावर प्लांट से 70 दिन ही बिजली ली, जबकि बाकी दिन बिजली लिए बिना ही फिक्स चार्ज के रूप में करीब 993 करोड़ रुपए दे दिए। इसके अलावा सात उत्पादन कंपनियों की बिजली दर ज्यादा होने के बावजूद 4 करोड़ रुपए प्रतिदिन (बिजली खरीद बिना) देने पड़ रहे हैं। इसमें पच्चीस साल पुराने पावर प्लांट भी हैं। गौरतलब है कि प्रदेश में बिजली कंपनियों का घाटा 86 हजार करोड़ को पार कर गया है। पिछले वित्तीय वर्ष में ही यह आंकड़ा 6740 करोड़ रुपए है।

दो थर्मल पावर स्टेशन से 70 दिन ही ली बिजली, 993 करोड़ रुपए दिए
1. सूरतगढ़ थर्मल पॉवर स्टेशन : पिछले एक साल में 30 दिन ही बिजली ली गई। 335 दिन बिजली नहीं ली, लेकिन उसके लिए 639 करोड़ रुपए फिक्स चार्ज दिए। इसमें 6 रुपए यूनिट हैं।

2. धौलपुर कम्बाइन्ड साइकिल पावर प्लांट : पिछले दो साल में करीब 40 दिन ही बिजली ली गई। बाकी के दिन के करीब 354 करोड़ रुपए फिक्स चार्ज का भुगतान किया गया।
(राज्य विद्युत उत्पादन निगम के अनुसार, इसमें शटडाउन के दिन अलग हैं)

इनकी बिजली दर 14 रुपए यूनिट तक..
अंता (आरएलएनजी) 7.17 रुपए प्रति यूनिट, धौलपुर जीपीएस 7.50 रुपए, दादरी 7.39 रुपए, ओरैया (आरएलएनजी) 11.72 रुपए, ओरैया (लिक्विड) 13.52 रुपए, दादरी (लिक्विड) 13.46 रुपए और अंता (लिक्विड) 13.91 रुपए प्रति यूनिट की बिजली खरीद दर है। बिजली कंपनियां फिलहाल इनसे बिजली खरीद नहीं रही है लेकिन अनुबंध के तहत इन्हें फिक्स चार्ज देने पड़ रहे हैं, जो प्रतिदिन करीब 4 करोड़ रुपए है।

यूं समझें फिक्स चार्ज:
ईंधन खरीद के अलावा पावर प्लांट संचालन में जो भी खर्चा आ रहा है, वह फिक्स चार्ज में जोड़ा जाता है। इसमें पूंजी लागत, ब्याज, संचालन व रखरखाव, डेप्रिसिएशन (मूल्य ह्रास) शामिल है। अनुबंध के तहत बिजली कंपनियां भले ही उत्पादन कंपनियों से बिजली खरीदे या नहीं, उन्हें फिक्स चार्ज देना ही होगा।

-विद्युत मंत्रालय की गाइडलाइन के तहत यहां ऐसे सभी पावर परचेजट एग्रीमेंट का अध्ययन कर रहे हैं, जहां बिजली खरीद दर अपेक्षाकृत महंगी है। पच्चीस साल पुराने अनुबंध रद्द कैसे किए जा सकते हैं, इस पर विशेषज्ञों से भी राय ले रहे हैं। विद्युत उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। -दिनेश कुमार, प्रमुख शासन सचिव, ऊर्जा विभाग

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