मिलावट का 'जहरीला' खेल

मिलावट का 'जहरीला' खेल

Aryan Sharma | Updated: 08 Aug 2019, 02:05:05 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

  • खाद्य पदार्थों में बेधड़क हो रही है मिलावट (Food Adulteration)
  • भ्रष्ट तंत्र और कड़ी कार्रवाई नहीं होने से बच निकलते हैं मिलावटखोर

जो चीज आप खा रहे हैं, वह शुद्ध हो इसकी कोई गारंटी नहीं है। दरअसल, खान-पान की चीजों में मिलावट के रूप में लोगों को धीमा जहर परोसा जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में मिलावटी, दूषित, घटिया और नकली ब्रांड वाले खाद्य पदार्थों (Misbranded food) की तादाद बढ़ी है। इसके बावजूद भ्रष्ट तंत्र और मजबूत निगरानी नहीं होने से मिलावट का यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है।

आर्यन शर्मा/जयपुर. खाद्य पदार्थों में मिलावट, नकली ब्रांड और घटिया गुणवत्ता के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। मुनाफाखोरी और व्यापार की प्रतिस्पर्धा के कारण मिलावट का यह खेल बेधड़क चल रहा है। दाल, दूध, मावा, घी, मसाले, आटा, फल-सब्जियां सहित खाने-पीने की लगभग हर चीज में मिलावट है। वहीं, कंपनियों के उत्पाद भी गुणवत्ता के पैमाने पर खरे नहीं उतर रहे हैं। स्वास्थ्य व खाद्य विभाग में भ्रष्टाचार इतने चरम पर है कि वे मिलावटखोरी पर लगाम कसने में नाकाम नजर आ रहे हैं। इसका खामियाजा मिलावटी चीजों को खा रहे आमजन को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि इनमें मौजूद हानिकारक रसायन तरह-तरह की बीमारियों का कारण बन जाते हैं।
खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी रोकने और गुणवत्ता स्तरीय बनाए रखने के लिए देश में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 (Food safety and standards act 2006) लागू है, जिसमें जुर्माना और सजा दोनों का प्रावधान है। इसके बावजूद मोटे मुनाफे के लालच में मिलावट का यह धंधा धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। त्योहारी सीजन में तो खाद्य पदार्थों में मिलावट और घटिया गुणवत्ता का यह खेल चरम पर होता है।
वर्ष 2018-19 में सार्वजनिक प्रयोगशाला में 94,288 विश्लेषित नमूनों में से 26,077 नमूने मिलावटी और गलत ब्रांड लगे पाए गए। ऐसे में खान-पान की बुनियादी चीजों की गुणवत्ता पर सवाल उठना लाजिमी है। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का ध्यान रखने, मिलावट पर नियंत्रण करने व खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का जिम्मा भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (Food safety and standards authority of india : एफएसएसएआइ) का है लेकिन जिस तेजी से मिलावट के मामले सामने आ रहे हैं, उससे लगता है कि एफएसएसएआइ अपना काम ठीक से नहीं कर पा रहा है। हर त्योहारी सीजन में मिलावट रोकने के लिए अभियान जरूर चलाया जाता है लेकिन कड़ी कार्रवाई के अभाव में इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। ज्यादातर मामलों में सरकारी तंत्र केवल खानापूर्ति करता ही नजर आता है। इसके अलावा फूड टेस्टिंग के लिए प्रयोगशालाएं (Food testing laboratory) भी पर्याप्त नहीं हैं, जिसके कारण हजारों की तादाद में आने वाले सैम्पलों की कई महीनों तक जांच ही नहीं हो पाती। इस बीच मिलावटी और मिस ब्रांडेड खाद्य पदार्थ बेरोकटोक बाजार में बिकने के लिए आ जाते हैं। अधिकतर मामलों में दोष सिद्ध होने पर केवल जुर्माना वसूल कर ही इतिश्री कर ली जाती है। यही नहीं, खाद्य पदार्थों में हानिकारक रसायनों की मिलावट का मसला कई बार संसद में भी उठ चुका है लेकिन कोई ठोस समाधान निकलकर नहीं आया है। मिलावटखोरों को मौत की सजा के प्रावधान वाला विधेयक भी लंबित है। ऐसे में सरकार को मिलावट को रोकने के लिए ठोस नीति बनाकर उसका उचित क्रियान्वयन कराने की जरूरत है।

देश में एक तिहाई से ज्यादा नमूने मिलावटी व नकली
वर्ष नमूने विश्लेषित मिलावटी व गलत ब्रांड दर्ज मामले दोष सिद्ध
2013-14 72,200 13,571 10,235 3,845
2014-15 75,282 14,716 10,675 1,402
2015-16 72,499 16,133 9,979 540
2016-17 78,340 18,325 13,080 1,605
2017-18 85,729 20,390 - 4,915
2018-19 94,288 26,077 20,125 475
32,75,73,587 रुपए का जुर्माना वसूला गया 2018-19 में

सार्वजनिक प्रयोगशाला परीक्षण रिपोर्ट (2018-19): उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मिलावट
राज्य नमूने विश्लेषित मिलावटी व गलत ब्रांड पाए गए नमूने
उत्तर प्रदेश 22,583 11,817
पंजाब 11,920 3,403
तमिलनाडु 5,730 2,601
मध्यप्रदेश 7,063 1,352
महाराष्ट्र 4,742 1,089
गुजरात 9,884 822
केरल 4,378 781
जम्मू-कश्मीर 3,600 701
आंध्र प्रदेश 4,269 608
हरियाणा 2,929 569
स्रोत: एफएसएसएआइ

नेशनल मिल्क सेफ्टी एंड क्वालिटी सर्वे 2018 : दूध के 9.9 फीसदी नमूने असुरक्षित
कुल नमूने लिए गैर प्रसंस्कृत दूध प्रसंस्कृत दूध असुरक्षित पाए गए
6,432 3,825 2,607 638
39 फीसदी नमूने एफएसएसएआइ के गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं

4.20 लाख लोगों की मौत होती है हर साल मिलावटी और घटिया खाद्य पदार्थों के कारण दुनिया में
करीब 60 करोड़ लोग मिलावटी खाना खाने से बीमार पड़ते हैं हर साल
200 से अधिक बीमारियों का कारण बनता है हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस या रासायनिक पदार्थों से युक्त असुरक्षित फूड
(डब्ल्यूएचओ के मुताबिक)

इन खाद्य पदार्थों में होती है ज्यादा मिलावट
दाल, दूध, मावा, पनीर, घी, खोया, सरसों और उसका तेल, मसाले (हल्दी, मिर्च, धनिया आदि), आइसक्रीम, कॉफी पाउडर, चावल, ड्राय फ्रूट्स, बेसन, सौंफ, चॉकलेट, सॉस व कैचअप, बोतलबंद पानी, फल व सब्जियां, मिठाइयां, अनाज, आटा, चाय पत्ती, पेय पदार्थ आदि।

शरीर पर दुष्प्रभाव
मिलावटी खाने से कई तरह की गंभीर बीमारियां होती हैं। मसलन, लिवर व किडनी की समस्या, पेट में गड़बड़ी, डायरिया, कैंसर, उल्टी, दस्त, जोड़ों में दर्द, पाचन तंत्र, रक्तचाप व हृदय संबंधी परेशानियां, फूड पॉइजनिंग, एनीमिया, त्वचा संबंधी बीमारियां आदि। कई दफा मिलावटी खाने से गर्भस्थ शिशु और मस्तिष्क तक को नुकसान पहुंचता है। सोचने की क्षमता भी प्रभावित होती है। गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. संदीप निझावन का कहना है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों में सिंथेटिक उत्पाद होते हैं, जो एडिबल प्रोडक्ट तो होते नहीं है। इस वजह से एसिडिटी, अल्सर जैसी परेशानियां हो जाती हैं। लिवर पर सूजन आ सकती है। हेपेटाइटिस भी हो सकता है। आमाशय पर भी असर पड़ता है।

खाद्य पदार्थों में मिलावट का खेल
सिंथेटिक दूध और नकली मावा: मध्यप्रदेश एसटीएफ और खाद्य विभाग की टीम ने 19 जुलाई 2019 को भिंड जिले के लहार और मुरैना जिले के अंबाह में छापा मार कर सिंथेटिक दूध व मावा बनाने की तीन फैक्ट्रियां पकड़ी। करीब 15 हजार लीटर सिंथेटिक दूध, 100 किलो नकली मावा और 1500 किलो पनीर जब्त किया गया।
नकली घी: 28 जुलाई 2019 को मध्यप्रदेश में राजधानी भोपाल से सटे औद्योगिक केन्द्र मंडीदीप में अशोक और खजुराहो ब्रांड के नाम पर नकली घी बना रही फैक्ट्री पर प्रशासन की टीम ने छापा मारा। यहां से कुल 157 क्विंटल नकली घी बरामद किया गया।
दाल में काला: 24 जनवरी को राजस्थान के जयपुर में जय इंडस्ट्रीज सरना डूंगर इंडस्ट्रियल एरिया से मूंग दाल के नमूने लिए गए, जिसमें मिलावट पाई गई। रेफरल लैब से भी इसकी पुष्टि हुई। 4000 किलो मूंग दाल सीज की गई।
अचार का बिगड़ा स्वाद: इसी साल 20 फरवरी को जयपुर के नजदीक बस्सी में एमएल गृह उद्योग पर छापे के दौरान 33 हजार किलो सड़े-गले मसालों से अचार व सॉस बनाने का मामला सामने आया। यहां कच्चा व तैयार माल पकड़ा गया। करीब 12 हजार किलो कच्चा माल ऐसा भी मिला, जिस पर एक्सपायरी फूड लिखा था। 8800 किलो तैयार अचार व सॉस सीज किया गया।

मध्य प्रदेश में सिर्फ एक ही अधिकृत लैब है, जो भोपाल में है। सालों से इसी सिस्टम के चलते सैम्पल की रिपोर्ट समय पर नहीं आ पाती। इस कारण कलक्टर कोर्ट में भी मामले देर से जाते हैं। सजा मिलने में देरी होती है। वर्तमान में 3 हजार से ज्यादा सैम्पल जांच के लिए पेंडिंग हैं, जो भोपाल सहित अन्य शहरों से आए हैं।
-देवेंद्र वर्मा, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, मध्य प्रदेश

इस साल मिलावट के खिलाफ युद्ध स्तर पर अभियान चलाया गया है। लाखों किलो दूषित खाद्य सामग्रियां नष्ट करवाई गई हैं। मिलावट के कानून को और सख्त किया जा रहा है। नमूने लेने के बाद उनकी जांच करवाने के बाद कानूनी कार्यवाही की जाती है।
-डॉ. वीके माथुर, आयुक्त खाद्य सुरक्षा, राजस्थान

 

 

 

 

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