काम के समय को लेकर छिड़ी बहस, कई कम्पनियां कर चुकी हैं ये प्रयोग

विश्व के कई हिस्सों में लोगों ने फिनलैंड की नवनिर्वाचित युवा प्रधानमंत्री सना मारिन की 4 डे वर्किंग वीक नीति का समर्थन किया।

बीते दिनों फिनलैंड की नवनिर्वाचित युवा प्रधानमंत्री सना मारिन पूरी दुनिया में खासी चर्चा का विषय रहीं। सत्ता में आने के बाद मारिन के सप्ताह में चार दिन और दिन के छह घंटे काम करने की नीति लागू करने के बयान ने चोतरफा सुर्खियां बटोरी। विश्व के कई हिस्सों में लोगों ने मारिन की 4 डे वर्किंग वीक नीति का समर्थन भी किया। लेकिन बाद में फिनलैंड की सरकार ने इस खबर का खण्डन करते हुए कहा कि फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है। हालांकि 4 डे वर्किंग वीक और काम के घंटे कम करने को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई। कई बड़ी कम्पनियां इसे प्रयोग के रूप में लागू कर चुकी हैं और कुछ इस प्रावधान को लाने पर विचार कर रही हैं। कई देश भी ये पहल कर चुके हैं।

इन्होंने की पहल
1. स्वीडन 2015 में ही प्रतिदिन छह घंटे काम करने का प्रावधान लागू कर चुका है। इससे वहां के कर्मचारी खुश व स्वस्थ्य रहने के साथ ही और ज्यादा प्रोडक्टिव हुए हैं।
2. गत वर्ष नवम्बर में जापान में स्थित माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने कर्मचारियों के लिए तीन दिन का वीकेंड घोषित किया था। इसका नतीजा यह रहा कि कम्पनी की प्रोडक्टिविटी रेट 39.9 फीसदी तक बढ़ गई है। साथ ही बिजली के बिल में 23 फीसदी तक कमी आई।
3. स्विट्ज़रलैंड की कम्पनी प्रिपेट्यूल गार्डियन ने साल 2018 में पहली बार सप्ताह के चार दिन काम करने की नीति ट्रायल के तौर पर लागू की। दो महीने तक चला यह ट्रायल काफी सफल रहा। कम्पनी में कार्यरत 240 कर्मचारियों को सप्ताह में चार दिन ही काम करना था, जबकि उनकी तनख्वाह में कोई बदलाव नहीं किया गया। कम्पनी के फाउंडर एंड्रयू बार्नेस की इस पहल ने पूरे विश्व में खूब सुर्खियां बटोरी और हर तरफ से उन्हें समर्थन मिला।
4. साल 2008 में यूएसए में उताह राज्य की सरकार ने सोमवार से गुरुवार तक प्रतिदिन 10 घंटे काम करने का प्रावधान लागू किया। इसके पीछे मुख्य मकसद बिजली, ट्रांसपोर्टेशन जैसे कई अन्य खर्चों पर लगाम लगाना था। हालांकि 2011 में वीटो पावर के साथ इस व्यवस्था को समाप् त कर दिया गया।

5. 2018 के अंत से ब्रिटेन में भी 4 डे वीक वर्क कल्चर की मांग उठने लगी, खासकर कॉल सेंटर्स कम्पनियों में। इससे पहले 2013 में गाम्बिया के तत्कालीन राष्ट्रपति ने याहया जामेह ने भी यह व्यवस्था लागू की थी। उनका कहना था कि कर्मचारी बचा हुआ समय प्रार्थना और खेती में खर्च करें।

Mridula Sharma
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