पाकिस्तान से आए 42 टिड्डी दल, 2.5 लाख हैक्टेयर फसल प्रभावित

पाकिस्तान से आए 42 टिड्डी दलों ने प्रदेश के 29 जिलों में करीबन ढाई लाख लीटर हैक्टेयर भूमि को प्रभावित किया है। वहीं, टिड्डियों ने अन्य राज्यों में भी किसानों के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं।

By: kamlesh

Published: 22 Jun 2020, 02:35 PM IST

जयपुर। पाकिस्तान से आए 42 टिड्डी दलों ने प्रदेश के 29 जिलों में करीबन ढाई लाख लीटर हैक्टेयर भूमि को प्रभावित किया है। वहीं, टिड्डियों ने अन्य राज्यों में भी किसानों के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य-कृषि संगठन (एफएओ) ने बीते साल के मुकाबले इस बार टिड्डियों का हमला दो से तीन गुना तक होने की जताई गई है। इससे किसानों व सरकार दोनों की चिंता बढ़ गई है।

अटका हेलीकॉप्टर स्प्रे
सरकार ने वायुसेना के पांच हेलीकॉप्टर से स्प्रे की स्वीकृति दे दी, लेकिन स्पेयर पाट्र्स नहीं मिलने से मामला अटक गया है। बैटरी संचालित ड्रोन से खेतों में बार-बार कीटनाशक डालने में काफी समय खर्च होने से ये भी कारगर साबित नहीं हो रहे हैं। यहां बड़े-बड़े पेड़ों को टिड्डियों द्वारा डेरा बनाए जाने से ट्रैक्टर स्प्रे मशीनों द्वारा उन्हें नष्ट करने का लक्ष्य अधूरा रह जाता है।

....तो बर्बाद हो जाएगी खरीफ की फसल!:
प्रदेश के कई पश्चिमी जिलों में किसानों के लिए खेती का साधन महज खरीफ की फसल ही है। इसी से अन्न और पशुओं के लिए सालभर के चारे का इंतजाम होता है। अक्टूबर तक टिड्डियोंं के आने की आशंका के चलते इस फसल पर गहरा संकट खड़ा हो गया है।

यों बेकाबू हुआ टिड्डी दल
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बीते साल बारह प्रभावित जिलों में टिड्डी पर लगभग पूरा नियंत्रण हो गया था। इस बार मार्च में पाकिस्तान में बारिश के बाद शेष बची टिड्डियों ने अंडे दे दिए। इसके बाद अप्रेल माह में टिड्डियों ने हवा के वेग के साथ बॉर्डर पार कर ली। इन दिनों पश्चिमी जिलों में आंधियों-तेज हवा का दौर जारी है, जिससे उडऩे में आसानी के चलते टिड्डी दलों के द्वारा 100 के बजाय 200-250 किमी. की दूरी प्रतिदिन तय की जा रही है। वर्तमान में ईरान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कुछ इलाकों में इनका प्रजनन हुआ है। ऐसे में वहीं से टिड्डियां प्रदेश में आ रही है। अब यहां भी इनके द्वारा प्रजनन के चलते संभवत: अक्टूबर तक हालात सामान्य नहीं होने का अनुमान है। हालांकि इस बार टिड्डियों का दल प्रदेश में जल्दी आया है। हालांकि इनकी प्रजातियों में भी अंतर स्पष्ट हो रहा है।

इस बार टिड्डी दल ज्यादा तादाद में और जल्दी आ गए है। पश्चिमी इलाकों में वनस्पति कम होने से व हवा के रूख के साथ ये दूसरे जिलों व राज्यों में बढ़ रहे हैं। इनके नियंत्रण के लिए संसाधन लगाने के साथ ही टीमें बनाकर काम कर रहे हैं। कुछ उपकरण जल्द आ जाएंगे। कोशिश है कम से कम नुकसान हो।
-के. एल गुर्जर, उप निदेशक, टिड्डी चेतावनी संगठन

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