script49 workers lost their lives in septic tank did not get compensation | सेप्टिक टैंक में जान गंवाने वाले 49 कामगारों को नहीं मिला मुआवजा | Patrika News

सेप्टिक टैंक में जान गंवाने वाले 49 कामगारों को नहीं मिला मुआवजा

सीवरेज और सेप्टिक टैंक में दम तोड़ने वाले 49 कामगारों के परिजन अब तक मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं। पिछले पांच साल में देश में सेप्टिक टैंक में 325 मजदूरों की मौत हुई, लेकिन इनमें से 276 कामगारों के परिजनों को ही मुआवजा मिल सका।

जयपुर

Published: June 17, 2022 08:57:17 pm

सीवरेज और सेप्टिक टैंक में दम तोड़ने वाले 49 कामगारों के परिजन अब तक मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं। पिछले पांच साल में देश में सेप्टिक टैंक में 325 मजदूरों की मौत हुई, लेकिन इनमें से 276 कामगारों के परिजनों को ही मुआवजा मिल सका।
सेप्टिक टैंक
सेप्टिक टैंक
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने पेयजल और स्वच्छता विभाग के सहयोग से यंत्रीकृत स्वच्छता इको सिस्टम के लिए राष्ट्रीय नीति तैयार की, लेकिन इसकी पालना को लेकर कोई गंभीरता नहीं बरत रहा है। नतीजतन, ये सीवरेज और सेप्टिक टैंक मौत के कुएं बने हुए हैं।
प्रदेश में आयोजित विभिन्न कार्यशालाओं में पिछले चार वर्षों में 1183 सफाईकर्मियों को स्वच्छता कार्य में कौशल उन्नयन प्रशिक्षण प्रदान किया गया, लेकिन यह भी महज कागजी साबित हो रहा है।

नाम की नीति
  • प्रत्येक जिले में जिम्मेदार स्वच्छता प्राधिकारी की नियुक्ति।
  • प्रत्येक नगरपालिका में स्वच्छता रेस्पॉन्स इकाई (एसआरयू)।
  • एसआरयू को यंत्रीकृत सफाई के लिए आवश्यक उपकरणों व वाहनों से लैस करना।
  • यंत्रीकृत सफाई के लिए व्यावसायिक रूप से प्रशिक्षित जन शक्ति।
  • सीवर और सेप्टिक टैंक के अवरुद्ध होने पर 24 घंटे की हेल्पलाइन।
योजनाएं हैं, लेकिन लाभार्थी कम
सौ फीसदी मशीनरी सफाई को बढ़ावा देने और स्वच्छता कार्यकर्ताओं व उनके आश्रितों को स्थाई आजीविका प्रदान करने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं संचालित हैं, लेकिन जागरूकता के अभाव में ग्राउंड लेवल तक इनका लाभ नहीं मिल रहा।
स्वच्छता उद्यमी योजना के तहत सफाई कर्मचारियों और स्थानीय निकायों को स्वच्छता संबंधी उपकरणों और मशीनों की खरीद के लिए 50 लाख रुपए तक के रियायती ऋण देने का प्रावधान है। लेकिन योजना शुरू होने से अब तक प्रदेश में महज 33 सफाई कर्मचारियों ने इसका लाभ उठाया है।
जबकि आंध्रप्रदेश में 1603 कामगारों ने इसकी सहायता ली। वहीं सफाईकर्मियों व उनके आश्रितों को स्वच्छता संबंधी परियोजनाओं के लिए 5 लाख रुपए तक पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करने के लिए स्वरोजगार स्कीम को 2020-21 से संशोधित किया गया। इसके तहत राजस्थान में एक भी सफाईकर्मी ने सहायता नहीं ली।
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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी (@aanandmani) राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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