सीकर के इस युवक ने पढ़ाई की डॉक्टर की और बन बैठा ठग...धोखे की नई कहानी

सीकर के इस युवक ने पढ़ाई की डॉक्टर की और बन बैठा ठग...धोखे की नई कहानी
66 million cheating doctor for tender, sog arrest from sikar

Dinesh Kumar Gautam | Updated: 22 Jul 2019, 01:08:12 AM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

जयपुर के सवाईमानसिंह मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई कर डॉक्टर बना एक युवक कैसे बन गया शातिर ठग. न सिर्फ पेशा छोड़ा बल्कि पेशे के नाम पर लोगों को भी लगाई लाखों रुपए की चपत. मेडिकल कॉलेजों में नौकरी दिलवाने और कॉलेजस में टेन्डर दिलवाने के नाम पर 66 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया तो एसओजी ने सीकर के इस होनहार डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया। डॉ.पारूल शर्मा के डॉक्टर से ठग बनने के पीछे की कहानी बताते हैं आपको.

जयपुर

जयपुर के सवाईमानसिंह मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई कर डॉक्टर बना एक युवक कैसे बन गया शातिर ठग. न सिर्फ पेशा छोड़ा बल्कि पेशे के नाम पर लोगों को भी लगाई लाखों रुपए की चपत. मेडिकल कॉलेजों में नौकरी दिलवाने और कॉलेजस में टेन्डर दिलवाने के नाम पर 66 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया तो एसओजी ने सीकर के इस होनहार डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया। डॉ.पारूल शर्मा के डॉक्टर से ठग बनने के पीछे की कहानी बताते हैं आपको.
एसओजी के एडीजी अनिल पालीवाल की माने तो आरोपी पारूल शर्मा निवासी सीकर के रामलीला मैदान के पास का रहने वाला है. उसके खिलाफ पूरण यादव ने शिकायत दी थी कि 2017 में आलोक शर्मा व संजय शर्मा के मार्फत वह डॉ. पारूल नाम से सचिवालय की सरस पार्लर कैंटीन में मिला थाण् उसने खुद को सीकर मेडिकल कॉलेज में नोडल ऑफिसर व एमबीबीएस डॉक्टर होना बताया और राजनीतिक पहुंच का हवाला देते हुए कहा कि वह सात नए मेडिकल कॉलेज में एल्यूमिनियम व ग्लास कार्य के लिए टेंडर दिलवाने व लैब टैक्नीशियन व एलडीसी के पदों पर नियुक्ति करवा देगा।

परिवादियों को थमाए फर्जी वर्क ऑर्डर

आरोपी के झांसे में आए पीडि़त ने अलग-अलग तारीखों में करीब 66 लाख रुपए ले लिए। परिवादी को चिकित्सा विभाग, राजस्थान सरकार के फर्जी नियुक्तिआदेश और कागजात दे दिए। टेंडरों के लिए भी इंडियन मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के फर्जी वर्क ऑर्डर दे दिए।

कमीशन एजेंट से ठग नंबर वन तक
पूछताछ में आरोपी ने वर्ष 2008 में एसएमएस मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करना बताया है। शुरूआत में तो पारूल ले चूरू में नौकरी की, इसके बाद पीजी ऑर्थोपेडिक्स में करना चाहता था, लेकिन चयन नहीं हुआ। इसके चलते पारूल ने सरकारी दवाइयों की सप्लाई में कमीशन एजेंट का काम करना शुरू कर दिया। आरोपी से धोखाधड़ी की रकम व इसके अन्य साथियों के बारे में पूछताछ की जा रही है।

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