73 फीसदी लोगों का मानना है कि स्कूली पाठ्यक्रम अब राजनीति का जरिया बन रहा है

Prahlad Choudhary

Publish: May, 13 2019 09:19:33 PM (IST)

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

सरकार बदलती है तो देश के महापुरुषों के बारे में नजरिया भी बदल जाता है, जी हां ऐसा नजारा आजकल राजस्थान में देखने को मिल रहा है. प्रदेश में सत्तारूढ़ सरकारें अपने प्रतीक पुरुषों को महत्व देती हैं तो विपक्ष के नेता हमलावर भी हो जाते हैं. ऐसा सियासी खेल राजस्थान सन् 1998 से ही हो रहा है और शायद आगे भी ऐसा खेल जारी हो. बरहाल इन सबके बीच उन बच्चों पर पड़ रहा है जो अपना भविष्य सवारने के लिए देश के इतिहास पढ़ रहे है. पिछली बीजेपी सरकार ने स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रमों में बदलाव करते हुए वीर सावरकर को महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता संग्राम का योद्धा बताया था. सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने पाठ्यक्रम में तब्दीली करते हुए वीर सावरकर के पाठ्यक्रम में जोड़ दिया है
कि अंग्रेजों की यातनाओं से तंग आकर सावरकर चार बार माफी मांग कर जेल से बाहर आए थे. इस तमाम वाक्या को देखते हुए पत्रिका टीवी ने सोशल मीडिया पर पोल के जरिए लोगों से एक सवाल किया था कि क्या स्कूल पाठ्यक्रम को राजनीति का जरिया बनाया जाता है?

हैरानीभरी बात तो ये रही कि इस पोल में 73 फीसदी लोगों का मानना है कि स्कूली पाठ्यक्रम राजनीति का जरिया बन रहा है.

 

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