script83% of Panchayats in Rajasthan are desperate for 'locus' | राजस्थान में 83% पंचायतें ‘ठिकाने’ की मोहताज | Patrika News

राजस्थान में 83% पंचायतें ‘ठिकाने’ की मोहताज

सत्ता संभालने के बाद जोर-शोर से पंचायत पुनर्गठन कराने वाली सरकार चुनाव के बाद अब नई बनी पंचायतों को भूल बैठी है। पुनर्गठन के जरिए नवंबर, 2019 में सरकार ने 1455 ग्राम पंचायतों को नए नाम तो दे दिए, लेकिन तकरीबन ढाई साल बीतने के बाद 83 प्रतिशत पंचायतों को कामकाज के लिए नए कार्यालय तक नहीं दे पाई है।

जयपुर

Published: June 23, 2022 06:24:22 pm

सत्ता संभालने के बाद जोर-शोर से पंचायत पुनर्गठन कराने वाली सरकार चुनाव के बाद अब नई बनी पंचायतों को भूल बैठी है। पुनर्गठन के जरिए नवंबर, 2019 में सरकार ने 1455 ग्राम पंचायतों को नए नाम तो दे दिए, लेकिन तकरीबन ढाई साल बीतने के बाद 83 प्रतिशत पंचायतों को कामकाज के लिए नए कार्यालय तक नहीं दे पाई है।
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परिसीमन में कुल बनाई गई 1455 नई ग्राम पंचायतों में से पंचायत राज विभाग ने 1445 के लिए नए भवनों की आवश्यकता का आकलन किया था। लेकिन 235 पंचायतों के ही नए भवन बन पाए हैं। नई बनी 57 पंचायत समितियों के हाल तो और भी बदतर है। ढाई साल से सरकार इन संस्थाओं के लिए सिर्फ भूमि ही ढूंढ रही है। इनमें से एक भी पंचायत समिति का भवन अब तक बन कर पूरा नहीं हो पाया है। लंबा समय बीतने के बाद भी ’बेघर’ पंचायतें अपने कार्यालय राजकीय स्कूलों या अन्य किसी सरकारी भवन से संचालित करने को मजबूर हैं।
सियासी जोड़तोड़ के लिए नई पंचायती राज संस्थाएं बनाना और फिर भूल जाना सिर्फ कांग्रेस सरकार में ही सामने नहीं आया है। इससे पहले पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के समय 2014 में भी 723 नई ग्राम पंचायतें बनाई गई थी। 710 में भवन की जरूरत थी। आठ साल बाद भी 84 के भवन नहीं बने हैं। पंचायत समितियों में भी 47 में से 9 को नया ठिकाना नहीं मिला है।

नहीं बने ’बजट’ के अंबेडकर भवन
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की 2019 की बजट घोषणा अंबेडकर भवन भी नौकरशाही की कछुआ चाल के शिकार हो गए हैं। अब तक एक भी जमीन पर बन कर तैयार नहीं हुआ। 140 में से महज 8 में निर्माण शुरू हुआ है। बिना कार्यालय पंचायतों को अपने कामकाज में परेशानी हो रही है। सरकार जिला परिषदों को पंचायत भवन निर्माण का कार्य प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दे।
बंशीधर गढ़वाल, प्रदेशाध्यक्ष राजस्थान सरपंच संघ

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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी (@aanandmani) राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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