लॉकडाउन से रजिस्ट्रियों से आय में 98 फीसदी की आई कमी

पिछले साल अप्रेल में 295 करोड़ आय हुई, इस बार गिरकर 7.77 करोड़ रह गई

आय बढ़ाने के लिए लगाया 10 फीसदी सरचार्ज

 

By: Sunil Sisodia

Updated: 24 May 2020, 01:02 AM IST

जयपुर।

लॉकडाउन ने चल-अचल संपत्तियों की खरीद-बेचान पर विराम लगा दिया। निर्माण कार्यों के लिए लेबर न मिलने से करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट अटक गए हैं। इससे प्रदेश में पंजीयन कार्यालय में दस्तावेजों के पंजीयन रुक गया है। असर यह हुआ कि मुद्रांक एवं पंजीयन शुल्क के रूप में मिलने वाले करोड़ों रुपए सरकारी खजाने में नहीं पहुंच पाए हैं। ई-रजिस्ट्री के आंकड़े बताते है कि प्रदेश में अप्रेल में ये ग्राफ 98 फीसदी तक नीचे आ गया।
रिपोर्ट को देखें तो गत वित्त वर्ष 2019-20 के पहले माह यानी अप्रेल में पूरे प्रदेश में अचल सम्पत्तियों की रजिस्ट्री से सरकार को लगभग 295 करोड़ रुपए की आय हुई थी। जो इस साल अप्रेल में 98 फीसदी तक गिरकर महज 7.77 करोड़ रुपए ही रह गई। यही हाल मई के शुरूआती पखवाड़े में देखने को मिले है। वित्त वर्ष 2019-20 में मई माह में रजिस्ट्री से सरकार को 375 करोड़ रुपए की आय हुई थी, लेकिन मौजूदा वर्ष में 20 मई तक यह आय केवल 48 करोड़ ही हुई है।


आय बढ़ाने के लिए लगाया 10 फीसदी सरचार्ज
पिछले दिनों राज्य सरकार ने अपनी आय बढ़ाने के उदेश्य से स्टाम्प डयूटी पर लगने वाला सरचार्ज 10 फीसदी बढ़ा दिया। इससे पहले स्टाम्प डयूटी पर सरचार्ज 20 फीसदी था। वहीं इस साल फरवरी में सरकार ने अचल सम्पत्तियों की रजिस्ट्री पर लगने वाली स्टाम्प डयूटी को भी एक फीसदी बढ़ा दिया था। दरअसल अभी अचल सम्पत्तियों की रजिस्ट्री करवाने पर स्टाम्प डयूटी पुरुषों के लिए 6 फीसदी, महिलाओं के लिए 5 फीसदी व एससी-एसटी महिलाओं के लिए 4 प्रतिशत ड्यूटी देय। इसके अलावा 1 फीसदी रजिस्ट्रेशन शुल्क लगता है। वहीं कुल स्टाम्प ड्यूटी पर अब 30 फीसदी सरचार्ज अलग से लगता है

Sunil Sisodia Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned