कुछ ऐसा किया बदलाव कि सरकारी स्कूल बना मिसाल

कहते हैं कि इच्छा शक्ति व लगन हो तो पत्थरों से भी पानी निकाला जा सकता है। कुछ ऐसा ही किया है दूनी तहसील की ग्राम पंचायत सीतापुरा के गांव सरदारपुरा के ग्रामीणों व राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों ने।

By: Abhishek sharma

Published: 01 Apr 2016, 11:31 PM IST

कहते हैं कि इच्छा शक्ति व लगन हो तो पत्थरों से भी पानी निकाला जा सकता है। कुछ ऐसा ही किया है दूनी तहसील की ग्राम पंचायत सीतापुरा के गांव सरदारपुरा के ग्रामीणों व राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों ने।
ग्रामीणों के सहयोग व अपनी मेहनत से शिक्षक विद्यार्थियों को निजी विद्यालयों से भी बेहतर तालीम देने में जुटे हैं। यही कारण है कि इस स्कूल के पहली से कक्षा आठ तक अध्ययनरत विद्यार्थी बिना किताब देखे सभी सवालों का जवाब कुछ पलों में देते हैं। कई देशों की राजधानियां, स्वतंत्रता सैनानियों के नाम, परमवीर, महावीर चक्र से सम्मानितों, आजादी के महासंग्राम में शामिल वीरों, महापुरुषों के नाम, सामान्य ज्ञान प्रश्नों के सवाल, गीता, रामायण, भागवत सहित वेदों व धार्मिक ग्रंथों के श्लोक, संख्याओं की गणना इन्हें कंठस्थ है।
गुरुकुल की याद ताजा कर देता है वातावरण
विद्यालय का शांत वातावरण अनायास ही वर्षों पूर्व संचालित किए जाने वाले गुरुकुल की याद ताजा कर देता है। शिक्षकों व ग्रामीणों की मेहनत के दम पर विद्यालय जिले में शिक्षा, संस्कार व संस्कृति की अनूठी मिसाल बनता जा रहा है।
चरण छूकर शिक्षा की शुरुआत
विद्यालय में विद्यार्थियों की शिक्षा व संस्कारों की शुरुआत प्रतिदिन सुबह गुरु के चरण छूकर होती है। इसके बाद शिक्षण सामग्री यथा स्थान कक्षों में रख प्रार्थना स्थल पर पहुंच करीब आधे घंटे तक प्रार्थना, गुरु वन्दना करते हैं।
प्रतिदिन शैक्षणिक स्तर की होती है जांच
प्रार्थना स्थल पर शिक्षक उन्हें समाचार पत्र की खबरों के अलावा राज्य, देश व क्षेत्र के हालातों की जानकारी देते हैं। प्रतिदिन उनके शैक्षिणक स्तर की जांच भी की जाती है।

मंत्रोच्चार के बाद पोषाहार
पोषाहार का समय होने पर विद्यार्थी कतारबद्ध होकर परिसर स्थित हैण्डपम्प पर साबुन से हाथ धोते हैं। अपने बर्तन लेकर दरी पट्टियों पर बैठ भोजन परोसे जाने पर एक लय में मंत्र का उच्चारण कर खाना प्रारम्भ करते हैं। अध्यापक सुरेन्द्रसिंह नरूका ने बताया कि भोजन के समय विद्यार्थी एक-दूसरे से बात भी नहीं करते। भोजन समाप्त कर वे कतारबद्ध हैण्डपम्प पर अपने बर्तन साफ करते हैं।
अध्यापक ने किया प्रेरित
विद्यालय में कार्यरत तत्कालीन अध्यापक प्रमोद स्वर्णकार ने पांच साल पहले शाला विकास समिति अध्यक्ष भंवरलाल गुर्जर सहित ग्रामीणों की बैठक लेकर विद्यालय में शिक्षण स्तर को बढ़ावा देने के लिए सहयोग मांगा। फिर क्या था। ग्रामीण तन, मन व धन से शैक्षणिक स्तर को सुधारने में जुट गए। देखते ही देखते इन पांच सालों में विद्यालय जिले में मिसाल बनता जा रहा है।  इस दौरान कक्षा-कक्षों व परिसर की दीवारों पर शैक्षणिक सामग्री की पेन्टिंग कराने के साथ-साथ ज्ञान-विज्ञान, सामान्य ज्ञान, कई देशों की राजधानियों, महापुरुषों, शहीदों, पूर्व प्रधानमंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, राष्ट्रपति,  उपराष्ट्रपति, हिन्दी-अंग्रेजी के वर्णाक्षरों, संसार, भारत, राज्य, जिला व तहसील के मानचित्र की पेंटिग भी कराई गई। इससे विद्यार्थी खेल के दौरान भी शैक्षिणक कार्य जारी रखता है। उल्लेखनीय है सर्व शिक्षा अभियान के तहत जिला परियोजना समन्वयक ने गत 28 मार्च को प्रधानाचार्य पुरुषोत्तम स्वर्णकार व अध्यापक सुरेन्द्रसिंह नरूका को जिला स्तर पर सम्मानित किया है।
हर सम्भव प्रयास करेंगे
विद्यालय में शैक्षिणक स्तर को और अधिक बढ़ाने के लिए मैं प्रयास करूंगा। जरूरत होगी तो विभागीय मंत्रालय को भी अवगत करा मदद के लिए कहा जाएगा।
राजेन्द्र गुर्जर, विधायक देवली-उनियारा
खेल मैदान भी मिले
स्थान अभाव होने से विद्यालय में अब केवल खेल गतिविधियां प्रभावित हैं। विभाग खेल मैदान की सुविधा उपलब्ध करा दे तो विद्यार्थी विद्यालय का नाम राज्य स्तर पर कर सकते हैं।
पुरुषोत्तम स्वर्णकार, कार्यवाहक प्रधानाचार्य, रा. उ. प्रा. विद्यालय सरदारपुरा (टोंक)

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