आदिवासी.गैर आदिवासी की खाई को पाटने की जरूरत : राज्यपाल

वागड़ अंचल का लोक साहित्य एवं संस्कृति विषयक अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

By: Rakhi Hajela

Published: 26 Feb 2021, 10:05 PM IST

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

राज्यपाल कलराज मिश्र (Governor Kalraj Mishra) ने कहा है कि आदिवासी और गैर आदिवासी के बीच पनपी भेद की खाई को मिलकर पाटने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसके लिए आदिवासी समाज को उनकी भाषा, संस्कृति, परम्पराओं और विशिष्टताओं को बचाए रखते हुए विकास की मुख्य धारा में जोड़ना होगा।
राज्यपाल शुक्रवार को यहां राजभवन में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर (Mohanlal Sukhadia University, Udaipur) में आयोजित वागड़ अंचल का लोक साहित्य एवं संस्कृति विषय पर अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं विश्वविद्यालय परिसर के 6 भवनों के शिलान्यास समारोह को ऑनलाइन संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान है, जिसे सहेजा जाना बहुत जरूरी है।
राज्यपाल ने सुझाव दिया कि आदिवासी क्षेत्र के युवाओं के माध्यम से इस समुदाय के रीति.रिवाज, उत्सव, परम्पराओं,लोककथाओं और लोकगीतों सहित उपलब्ध ज्ञान को एकत्रित कर इसका डिजिटलाइजेशन किया जाना चाहिए, ताकि भावी पीढ़़ी भी इससे रूबरू हो सके। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सीपी जोशी ने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित बोलियां ना सिर्फ सदियों से संचार का माध्यम रही हैं बल्कि स्थानीय ज्ञान.विज्ञान, कला.संस्कृति और लोक परम्पराओं की वाहक भी हैं। उन्होंने कहा कि इस रूप में वागड़ अंचल की वाचिक परम्परा को सहेजने की यह पहल यहां की लोक संस्कृति को अक्षुण्ण रखने की दिशा में दूरगामी साबित होगी। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में कॉलेज ऑफ़ आर्किटेक्चर, जनजाति फैमिली हॉस्टल, वाणिज्य महाविद्यालय के पुस्तकालय एवं सेमिनार हॉल के भवनों, कर्मचारी भवन, मेवाड़ पीठ भवन का शिलान्यास किया। उन्होंने वागड़ क्षेत्र के लोक एवं आदिवासी साहित्य, परम्पराओं और संस्कृति से जुड़़े महत्वपूर्ण पहलुओं को सम्मिलित करते हुए तैयार ई.पुस्तक फोकलोर ऑफ़ वागड़ का विमोचन भी किया।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned