पूरे जीवन की कमाई लगाने के बाद हाथ में केवल एक कागज रह जाता है— हाईकोर्ट

दोहरे और फर्जी पट्टों के मामले में पुलिस कमिश्नर हाईकोर्ट में हुए पेश

By: KAMLESH AGARWAL

Published: 05 Aug 2020, 10:15 PM IST

जयपुर

दोहरे पटटे जारी करने वाली गृह निर्माण सोसायटियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी देने के लिए पुलिस आयुक्त राजस्थान उच्च न्यायालय पेश हुए। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मौखिक तौर पर कहा कि लोग अपना घर बनाने के लिए पूरे जीवन की पूंजी लगा देते हैं और उनके हाथ में केवल एक कागज का टुकड़ा रह जाता है। जेडीए को ऐसी योजना बनानी चाहिए ताकि लोगों को सही और पूरी जानकारी मिल सके।

राजस्थान उच्च न्यायालय में दोहरे पट्टे और फर्जी पट्टे जारी होने के मामले में पुलिस कमिश्नर, जेडीए, सहकारिता विभाग और एसीएस गृह की अध्यक्षता में गठित कमेटी की ओर से शपथ पत्र पेश किया गया। इस दौरान पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव व्यक्तिगत तौर पर न्यायालय में उपस्थित रहे। न्यायालय ने दोहरे पट्टे जारी होने से आम लोगों को होने वाली मानसिक और आर्थिक नुकसान का जिक्र करते हुए कहा कि एक आम आदमी बड़ी मुश्किल से एक जमीन का टुकड़ा खरीदता है जिसमें पूरे जीवन की कमाई लगा देता है फिर दोहरे पट्टों की वजह से पता चलता है उसके हाथ में केवल एक कागज का टुकड़ा बचा है। जेडीए के पास ऐसी कोई योजना या बेवसाइट और पोर्टल नहीं है जिससे आम व्यक्ति को पूरी और सही जानकारी मिल सके। न्यायालय ने कहा कि जब जेडीए के अफसर फील्ड में रहते हैं तो उनको कोई कालोनी बसने की जानकारी क्यों नहीं मिलती है। न्याय मित्र अनूप ढंढ और अधिवक्ता विमल चौधरी ने पुलिस कार्रवाई पर असंतोष जाहिर किया। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए अब 22 सितंबर की तारीख तय की है।

पुलिस कमिश्नर से सीधे सवाल

न्यायालय में उपस्थित पुलिस कमिश्नर को मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत माहान्ती ने कहा कि उनको बुलाने का उद्देश्य मामले को उनके ध्यान में लाना था। इस पर पुलिस कमिश्नर श्रीवास्तव ने न्यायालय को पूरे मामले की खुद मोनेटरिंग करने का भरोसा दिलाया। इससे पहले पुलिस ने अपने शपथ पत्र में कहा कि अब दोहरे पट्टों के संबंध में 181 मामले बचे है जिन पर कार्रवाई की जा रही है। न्यायालय ने पुलिस कमिश्नर से सवाल जवाब भी किए
सीजे—आप दोहरे पट्टों के संबंध में दर्ज मामलों में जल्द कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे ?
कमिश्नर— सभी मामलों में कार्रवाई हो गई है केवल जिनमें सिविल कैसेज चल रहे हैं वे मामले शेष रहे हैं
सीजे— क्या किसी सिविल केस में न्यायालय का स्टे है या अपराधिक कार्रवाई करने पर रोक लगाई गई है
कमिश्नर — नहीं केवल मामले अदालत में चल रहे हैं
सीजे— केवल सिविल केस होने के आधार पर अपराधिक कार्रवाई नहीं रोकनी चाहिए। जब तक अदालत का इस संबंध में आदेश नहीं हो। पुलिस को जल्द से जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।

यह है मामला

एक जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने 6 फरवरी,2017 को हाउसिंग सोसायटियों की गडबडियों पर स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया था। न्यायालय ने मुख्यत: हाउसिंग सोसायटियों के दोहरे पटटे और पिछली तारीख में पटटे देने पर सहकारिता विभाग और पुलिस से विभिन्न बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी। कोर्ट ने 18 अक्टूबर,2019 को विस्तृत आदेश से शहर में हाउसिंग सोसायटियों की ओर से बसाई गई कॉलोनियों में से सुविधा क्षेत्र,सार्वजनिक जमीन,सडकें,फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाने,नगर निगम और जेडीए प्रवर्तन शाखा में इस काम के लिए अलग से प्रकोष्ठ बनाने,जोन उपायुक्तों को अपनी जोन में निरंतर अतिक्रमण चिन्हित कर उन्हें हटाने और इस संबंध में जोनवार पालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। पुलिस को दोहरे पटटे और पिछली तारीख में पटटे बनाने के मामले में कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। वहीं सरकार ने एसीएस होम की अध्यक्षता में अतिक्रमण हटाने व हाउसिंग सोसायटियों के मामले में कार्रवाई और नगर निगम,जेडीए और सहकारिता विभाग में कोआर्डिनेशन के लिए एक कमेटी बनाई थी।

KAMLESH AGARWAL Desk
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