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बज गया उपचुनाव का बिगुल! गोपनीय सर्वे में जुटी एजेंसियां, जुटा रही है हार जीत के आंकडे, ये मुद्दा रहेगा खास

अजमेर, अलवर और मांडलगढ में मंत्रियों को दी जिम्मेदारी...

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जयपुर

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Dinesh Saini

Oct 03, 2017

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जयपुर। प्रदेश में अजमेर-अलवर लोकसभा उपचुनाव और मांडलगढ विधानसभा उपचुनाव के लिए बिगुल बज गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां बिना उम्मीदवार तय किए ही अभी मैदान में उतर गई हैं। वहीं सरकारी एजेंसियां भी तीनों सीटों पर उपचुनाव से पहले हार-जीत के गणित का सर्वे करने में जुट गई हैं और तीनों सीटों पर बन रहे राजनीतिक समीकरणों का फीडबैक उच्च स्तर पर दे रहे हैं।

दूसरी ओर भाजपा ने उपचुनाव वाली तीन सीटों पर 15 मंत्रियों को उतारा हैं वहीं प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी एक दर्जन से ज्यादा पदाधिकारियों को मैदान में उतारा है। 5 अक्टूबर से मुख्यमंत्री का तीन दिवसीय दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

हो रहा है गोपनीय सर्वे
अजमेर , अलवर और मांडलगढ़ उपचुनाव मौजूदा सरकार के लिए अगले विधानसभा चुनाव के हिसाब से सेमीफाइनल साबित हो सकता है। लिहाजा सरकार के निर्देश पर सरकारी एजेंसियों ने पार्टी की हार जीत के गणित का गोपनीय सर्वे भी करना शुरू कर दिया है। सर्वे के हिसाब से मिल रहे फीडबैक को सरकारी एजेंसियां उच्च स्तर पर भेज रही हैं। बताया जा रहा है कि चुनाव से पहले सरकारी एजेंसियां सत्तारूढ पार्टी के लिए सर्वे करती हैं और अपनी रिपोर्ट देती है।

पार्टियों का मुद्दा विकास
जहां भाजपा दो लोकसभा सीट व एक विधानसभा सीट पर बीते साढ़े तीन साल में केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से किए गए विकास कार्यों के दम पर वोट लेने की तैयारी में है। वहीं कांग्रेस इन तीनों ही सीटों पर विकास नहीं होने के आधार पर वोट मांगने की तैयारी में है। जहां अजमेर में सांसद सांवरलाल जाट कद्दावर नेता थे, वहीं इस सीट से सचिन पायलट सांसद बन कर मंत्री रह चुके हैं। पायलट भी कई बार उनके मंत्री रहते हुए अजमेर में हुए विकास कार्यों को लेकर कह चुके हैं कि कांग्रेस के समय अजमेर का चौतरफा विकास हुआ था। वहीं अलवर में भी कांग्रेस विकास नहीं होने के नाम पर मैदान में उतर रही है। अलवर से पूर्व सांसद भंवर जितेन्द्र सिंह पार्टी के उम्मीदवार हो सकते हैं, लेकिन पार्टी ने अभी यहां भी उम्मीदवार का खुलासा नहीं किया है। वहीं मांडलगढ सीट पर भी ऐसा ही हाल है।

तीनों सीटों पर दोनों ही पार्टियों के उम्मीदवार तय नहीं
चूंकि अभी चुनाव आयोग की ओर से इन तीनों ही सीटों पर उपचुनाव की अधिसूचना जारी नहीं हुई है। वहीं भाजपा और कांग्रेस ने इन तीनों सीटों पर कौन पार्टी की ओर से उम्मीदवार होगा, यह तय नहीं किया है, लेकिन दोनों ही पार्टियों में सियासी घमासान शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री बारी-बारी से तीनों सीटों का दौरा करेंगी तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट व उनकी टीम भी मैदान में उतर गई है और चुनावी हार जीत के समीकरण बैठाने शुरू कर दिए हैं।