नई किस्म का चावल कुपोषण करेगा दूर

Indian Rice Research Institute : कृषि वैज्ञानिक खाने की वस्तुओं में पोषक तत्वों को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं ताकि पोषक तत्वों की कमी को दूर किया जा सके।

जयपुर

Indian Rice Research Institute : कृषि वैज्ञानिक खाने की वस्तुओं में पोषक तत्वों को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं ताकि पोषक तत्वों की कमी को दूर किया जा सके। भारतीय चावल अनुसंधान ने चावल की कुछ ऐसी नई किस्में विकसित की हैं,जिनमें पोषक तत्वों की मात्रा चावल की अन्य किस्मों की तुलना में दोगुना तक ज्यादा है। इन नई किस्मों को विकसित करने का फायदा यह होगा कि इन नई किस्मों से लोगों में कुपोषण की समस्या दूर की जा सकती है। अनुसंधान संस्थान की ओर से पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए चावल की सात किस्में विकसित की हैं। इन किस्मों की खास बात ये है कि इन किस्मों का चावल खाने से शरीर में जिंक की कमी को दूर हो सकेगी।

भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. नीरजा के मुताबिक देश में अधिकतर स्थानों पर खाने में चावल जरूर पकाया जाता है। ऐसे में संस्थान ने चावल की कुछ ऐसी किस्में विकसित की हैं, जिससे देश में जिंक की कमी को पूरा किया जा सकता है। नई किस्मों की बात करें तो चावल की बाकी किस्मों में जहां जिंक की मात्रा 2 पीपीएम होती है, जबकि नई किस्मों में जिंक की मात्रा 25 पीपीएम होती है। यानि जिंक की मात्रा दोगुना तक ज्यादा है।

आपको बता दें कि देश में पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडू, कर्नाटक, असम, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा और पंजाब में खास तौर पर चावल की पैदावार होती है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि जिकं और आयरन शरीर के लिए बेहद जरूरी है। इसकी कमी से पूरी दुनिया में हजारों लोग प्रभावित हैं। भारत की बात करें तो यहां जिंक की कमी से करीब 30 प्रतिशत लोग प्रभावित हैं। इसमें पांच साल से कम उम्र के बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हैं।
शरीर के लिए महत्वपूर्ण है जिंक
चावल की नई किस्मों के जरिए व्यक्ति को 58 प्रतिशत तक जिंक की मात्रा मिल जाती है। जिंक हमारे शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण खनिज है जो हमारे अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है। गर्भवती महिलाओं के लिए जिंक बहुत जरूरी होता है। जस्ता हमारे पूरे शरीर की कोशिकाओं में पाया जाता है। जिंक हमारे शरीर के ठीक से काम करने और इम्युनिटी सिस्टम के लिए बेहद जरूरी होता है।
चावल की ये नई किस्में
आपको बता दें कि हैदराबाद स्थित भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान ने चावल की जो तीन नई किस्म विकसित की हैं, उनका नाम है डीआरआर धान 45, डीआरआर धान 49, उड़ीसा स्थित केंद्रीय चावल अनुसंधान ने सीआर धान 310, सीआर धान 311 और रायपुर, छत्तीसगढ़ स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने जिंक ओ राइस और सीजीज़ेडआर 2 किस्में विकसित की हैं। जिनमें जिंक अच्छी मात्रा में रहेगा।

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