वायु प्रदूषण बना मौत की वजह

वायु प्रदूषण से होने वाली मौत के मामले में राजस्थान शीर्ष पर
वायु प्रदूषण से होने वाली एक चौथाई मौतें भारत में
ओजोन प्रदूषण बड़ा खतरा
वायु प्रदूषण से भी बढ़ रहा है मधुमेह
कार्यालयों के भीतर वायु प्रदूषण की मार ज्यादा गंभीर

By: Rakhi Hajela

Published: 05 Sep 2019, 07:34 PM IST

वायु प्रदूषण ( Air pollution ) के कारण होने वाली मौतों ( Death ) की आती है, तो राजस्थान ( Rajasthan ) इसमें शीर्ष पर है। यह खुलासा हुआ है डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर.राजस्थान चैप्टर की शुरुआत के मौके पर लेंसेट प्लांट हेल्थ रिपोर्ट में। रिपोर्ट ( Report ) के मुताबिक राज्य में हर एक लाख की आबादी पर वायु प्रदूषण से 112.5 लोगों की मौत होती है, जो भारत में सबसे अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के बाद दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश है जहां प्रति लाख की आबादी पर 111.1 लोगों की की मौत होती है। क्रोनिक ऑब्सट्रकटिव पल्मोनरी डिजीज से होने वाली मौतें की सूची में भी राजस्थान शीर्ष पर है। राज्य में हर एक साल की आबादी पर 24 की मौत अस्थमा से होती है। आपको बता दें कि वायु प्रदूषण को साइलेंट किलर कहा जाता है जिसके चलते हर साल दुनिया में ४.२ लाख मौतें होती हैं। वायु प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए तीसरा सबसे बड़ा खतरा बन गया है। अमेरिका स्थित हेल्थ इफेक्ट इंस्टीट्यूट और इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवेल्यूएशंस की ओर से जारी स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2019 रिपोर्ट के अनुसार, दूषित वायु धूम्रपान से भी ज्यादा मौतों का कारण बन रही है। वायु प्रदूषण के कारण दुनियाभर में 49 लाख मौतें हुई हैं। कुल मौतों में 8.7 प्रतिशत योगदान वायु प्रदूषण का रहा।


ओजोन प्रदूषण भी बना खतरा
ओजोन प्रदूषण पिछले एक दशक में बड़ा खतरा बनकर उभरा है। ओजोन प्रदूषण के कारण दुनियाभर में करीब पांच लाख लोगों की समय से पूर्व मौत हुई। 1990 के बाद इसमें 20 प्रतिशत इजाफा हुआ है और ज्यादातर इजाफा पिछले दशक के दौरान हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वायु प्रदूषण के कारण लोग समय से पूर्व मर रहे हैं और उनकी आयु 2.6 साल कम हुई है। आउटडोर पीएम के कारण जहां 18 महीने जीवन प्रत्याशा कम हुई, वहीं घरेलू प्रदूषण के चलते इसमें 14 महीने की कमी आई। यह कम जीवन प्रत्याशा के वैश्विक औसत से बहुत अधिक है।

भारत में समय से पूर्व मृत्यु सांस की बीमारियों, हृदय की बीमारियों, हृदयाघात, फेफड़ों के कैंसर और मधुमेह से जुड़ी हैं और यह सीधे तौर पर वायु प्रदूषण से प्रभावित है। ओजोन प्रदूषण फेफड़ों की बीमारियों को बढ़ाता है। वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों में 49 प्रतिशत फेफड़ों की बीमारियों, 33 प्रतिशत फेफड़ों के कैंसर, मधुमेह और हृदय की बीमारियों का 22.22 प्रतिशत और हृदयाघात का योगदान 15 प्रतिशत रहा। अध्ययन में पहली बार वायु प्रदूषण को टाइप.2 मधुमेह से जोड़ा गया है। भारत के लिए यह बेहद चिंता की बात है क्योंकि यह महामारी का रूप ले चुका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015 में मधुमेह की आर्थिक लागत वैश्विक अर्थव्यवस्था का 1.8 प्रतिशत थी और यह सभी देशों के स्वास्थ्य तंत्र के लिए तेजी से बढ़ती चुनौती है। अध्ययनकर्ता काफी विचार.विमर्श और अनुसंधान के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि पीएम.2.5 टाइप.2 मधुमेह के मामलों और मृत्यु को बढ़ाता है। विश्लेषण बताता है कि दुनिया की अधिकांश आबादी अस्वस्थ परिस्थितियों में जी रही है। 90 प्रतिशत से अधिक आबादी विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित हवा के मानकों के अनुसार हवा में सांस नहीं ले रही है

Rakhi Hajela Desk
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