हिमालय की सेहत बिगाड़ रहा है वायु प्रदूषण

उत्तर भारत का वायु प्रदूषण टकरा रहा है हिमालय से
ब्लैक कार्बन की परत चिपक रही है ग्लेशियर्स से

By: Suresh Yadav

Updated: 27 Nov 2019, 11:56 PM IST

जयपुर।

वायु प्रदूषण का असर उत्तर भारत पर जिस तरह बढ़ रहा है उससे पूरा देश चिंतित है। पिछले दिनों दिल्ली सहित आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण इस कदर बढ़ा कि लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो गया। ऑड-ईवन से लेकर स्कूलों की छुट्टी तक करनी पड़ी थी। अब एक नया खुलासा हुआ है। जिसमें बताया जा रहा है कि अब उत्तरी भारत का वायु प्रदूषण उच्च हिमालय क्षेत्रों की सेहत भी बिगाड़ रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के साथ आ रही हवाओं के साथ दिल्ली समेत उत्तरी भारत का वायू प्रदूषण हिमालय से टकरा रहा है। इससे ब्लैक कार्बन की परत ग्लेशियरों के ऊपर चिपक रही है। जिससे ग्लेशियरों के ऊपर जमी बर्फ जल्द पिघल रही है और ग्लेशियर के पिघलने की रफ्तार भी पहले के मुकाबले ज्यादा तेज हो गई है। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा उच्च हिमालय क्षेत्रों में लगाये गये उपकरणों से इस बात का खुलासा हुआ है। उनका यह शोध एक अंतरराष्ट्रीय साइंस जरनल में भी प्रकाशित हुआ है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि पोस्ट मानसून (सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर) के दौरान आने वाली पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत के ऊपर स्थित प्रदूषण को अपने साथ लेकर हिमालय श्रंखलाओं की तरफ बढ़ गया और हिमालय से टकराने के बाद ये प्रदूषण बर्फ भरी पहाडिय़ों में पड़ी बर्फ के साथ ही लगभग 3,000 से 35000 मीटर की ऊंचाई में स्थित ग्लेशियरों में ब्लैक कार्बन के रूप में चिपक गया है। ब्लैक कार्बन अपने नीचे गर्मी पैदा करते हैं। जिसके कारण ग्लेशियर के ऊपर हर मौसम में पड़ी बर्फ पिघल जाती है और इसके बाद इसका प्रत्यक्ष असर ग्लेशियर की सैकड़ों सालों की जमी बर्फ पर पड़ता है। जिससे ग्लेश्यिर सिकुडऩे लगते हैं। अगर वायू प्रदूषण ऐसे ही हिमालय की ओर बढ़ता रहा तो हिमालयी ग्लेशियरों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाएगा।
ब्लैक कार्बन के कारण तापमान में वृद्धि होती है, क्योंकि यह प्रकाश को अवशोषित करने और निकटवर्ती वातावरण की ऊष्मा की वृद्धि में अत्यधिक प्रभावी होता है। यह बादल निर्माण के साथ-साथ क्षेत्रीय परिसंचरण और वर्षा को भी प्रभावित करता है। बर्फ तथा हिम पर चिपक जाने पर, ब्लैक कार्बन और सह-उत्सर्जित कण एल्बिडो प्रभाव को कम करते हैं, जिसकी वजह से सतह के तापमान में वृद्धि होती हैं। इसके परिणामस्वरूप आर्कटिक और हिमालय जैसे ग्लेशियर क्षेत्रों में बर्फ पिघलने लगती है।

Suresh Yadav Desk
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