अजमेर: सांवरलाल के बाद कौन? सियासी भंवर में पायलट, BJP जाट परिवार पर खेलेगी दांव!

अजमेर लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव होना है। ये सीट भाजपा आैर कांग्रेस दोनों ही मुख्य पार्टियों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है।

By: Abhishek Pareek

Updated: 19 Aug 2017, 10:19 AM IST

जयपुर। राजस्थान में सांवरलाल जाट के निधन के बाद अजमेर लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव होना है। ये सीट भाजपा आैर कांग्रेस दोनों ही मुख्य पार्टियों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है। साथ ही इस चुनाव का नतीजा आगामी विधानसभा चुनाव में जनता के मूड को भी बताएगा। एेसे में दोनों ही राजनीतिक दल इस सीट को लेकर तैयारियों में जुट गए हैं।

भाजपा ने अजमेर सीट से जीत दिलाने वाले दिग्गजों के नामों पर विचार भी शुरू कर दिया है। हालांकि सांवरलाल जाट के कद का कोर्इ भी नेता भाजपा को इस सीट के लिए नजर नहीं आ रहा है। एेसे में जाट के परिवार के किसी सदस्य को चुनाव में उतारा जा सकता है। भाजपा के कुछ स्थानीय नेताआें ने भी सांवरलाल जाट के किसी परिजन को चुनाव मैदान में उतारने की वकालत की है। उन्होंने जो तर्क दिया है उसके मुताबिक जाट के परिवार से यदि कोर्इ उपचुनाव में उतरता है तो उसे मतदाताआें की सहानुभूति मिलेगी। सांवरलाल जाट के परिवार में उनकी पत्नी नर्मदा, बेटी सुमन आैर दो पुत्र रामस्वरूप आैर कैलाश हैं। इनमें से रामस्वरूप भाजपा के अजमेर देहात में महामंत्री है। वे लंबे समय से भाजपा से जुड़े हैं। एेसे में पार्टी उनके नाम पर विचार कर सकती है।

चुनाव मैदान में उतरने के इच्छुक नहीं पायलट!
भाजपा के उलट कांग्रेस के पास सचिन पायलट जैसा नाम है। हालांकि सूत्र बताते हैं कि पायलट उपचुनाव में उतरने के लिए फिलहाल तैयार नहीं है। 2009 के चुनाव में इस सीट से सचिन पायलट ने जीत दर्ज की थी। एेसे में पायलट यदि इस सीट से चुनाव मैदान में उतरते हैं तो ये कार्यकर्ताआें का भी उत्साह बढ़ाने वाला कदम होगा। राजस्थान विधानसभा चुनाव में अब बहुत कम वक्त रह गया है। कांग्रेस जीती तो सचिन पायलट मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे। हालांकि इस उपचुनाव में यदि पायलट हार जाते हैं तो फिर उनका मुख्यमंत्री बनने का सपना टूट सकता है। यही कारण है कि पायलट फिलहाल अजमेर उपचुनाव में उतरने को लेकर उलझन में हैं।

अहमद पटेल की जीत से बढ़ा गहलोत का कद
कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत भी कांग्रेस के विधानसभा चुनाव जीतने पर मुख्यमंत्री की दौड़ में होंगे। गुजरात में अहमद पटेल को जीत दिलाने में गहलोत ने जो भूमिका निभार्इ है उससे आलाकमान की नजर में उनका कद आैर बढ़ गया है। वे गुजरात के प्रभारी महासचिव थे आैर जीत के बाद अहमद पटेल ने उन्हें धन्यवाद दिया। इससे भी साफ होता है कि गहलाेत अपना कद बढ़ाने में कामयाब रहे हैं।

सियासी भंवर में फंसे पायलट
सचिन पायलट यदि इस अजमेर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में नहीं उतरते हैं तो यह संदेश जाएगा कि हार के डर से पायलट ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। एेसे में पायलट सियासी भंवर में फंस चुके हैं, जिसमें उनके लिए निकलना बेहद मुश्किल होगा हालांकि यदि वे इसमें कामयाब होते हैं तो फिर उनका कद आैर ऊँचा हो जाएगा।

आगामी विधानसभा चुनाव का मूड बताएगा ये चुनाव
राजस्थान में पिछले कुछ सालों में ये ट्रेंड रहा है कि एक बार भाजपा को सत्ता सुख भोगने का मौका मिलता है तो दूसरी बार कांग्रेस को। 2013 के विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता पर सवार होकर भाजपा रिकाॅर्ड जीत के साथ सत्ता में पहुंची थी। एेसे में ये चुनाव साफतौर पर आगामी विधानसभा चुनाव का मूड बताएगा। यही कारण है कि दोनों ही पार्टियों के लिए ये करो या मरो का मुकाबला होगा।

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