कांग्रेस नेता ​की अभद्र टिप्पणी, अब गिरफ्तारी पर लिया स्टे

जयपुर। राज्य में महिला असुरक्षा का आलम तो यह है कि वो किसी भी जगह हो, किसी भी रूप में, किसी गली में कि महलों में, या किसी आम सी नौकरी में कि बड़े सम्मानजनक पद पर आसीन हो, अपमानजनक और चारित्रिक टिप्पणियां तो उन्हें बर्दाश्त करनी ही होगी। यही जताया है राजस्थान के कांग्रेस के एक नेता और वकील राजेश टंडन ने। अजमेर में चार आईएएस महिला अफसरों पर आपत्तिजनक पोस्ट चलाकर टंडन ने पहले तो साफ कर दिया कि पितृसत्तात्मक सोच कहीं भी महिलाओं को सुरक्षित या सम्मानजनक स्थिति में नहीं देख सकती।

जयपुर। राज्य में महिला असुरक्षा का आलम तो यह है कि वो किसी भी जगह हो, किसी भी रूप में, किसी गली में कि महलों में, या किसी आम सी नौकरी में कि बड़े सम्मानजनक पद पर आसीन हो, अपमानजनक और चारित्रिक टिप्पणियां तो उन्हें बर्दाश्त करनी ही होगी। यही जताया है राजस्थान के कांग्रेस के एक नेता और वकील राजेश टंडन ने। अजमेर में चार आईएएस महिला अफसरों पर आपत्तिजनक पोस्ट चलाकर टंडन ने पहले तो साफ कर दिया कि पितृसत्तात्मक सोच कहीं भी महिलाओं को सुरक्षित या सम्मानजनक स्थिति में नहीं देख सकती। दूसरा यह कि उन्होंने अपने कानूनी पेंच की जानकारी का लाभ उठाकर अब अपनी गिरफ्तारी पर भी स्टे ले लिया है। यहां आपको बता दें कि 4 फरवरी को टंडन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट चलाई, जिसमें उन्होंने अजमेर की चार महिला आईएएस अधिकारियों से बचकर रहने की हिदायत दी। उन्होंने एक वीडियो क्लिपिंग का हवाला देते हुए लिखा था कि महिला अधिकारी का यह चरित्र देखना दुखद है। इन जैसी महिलाओं से नजदीकियां बढ़ाना खतरे से खाली नहीं। साथ ही उन्होंने लोगों को उनसे दूर रहने की अपील की।
इसके बाद अजमेर के अलग-अलग पुलिस थानों में महिला आईएएस अधिकारियों की शिकायत पर टंडन के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज हुई है। एफआईआर का सुनते ही टंडन ने अपना कानूनी पेंच चलाया और हाईकोर्ट से इस मामले में गिरफ्तारी से स्टे ले लिया। इस स्टे के बाद से महिला अधिकारी निराश हैं। इनमें से एक अधिकारी का कहना है कि इस पोस्ट के बाद से मैं रिश्तेदारों को जवाब नहीं दे पा रही, ना ही सामना कर पा रही हूं। वहीं दूसरी अधिकारी का कहना है कि ऐसी पोस्ट से आईएएस महिला अधिकारियों के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। सार्वजनिक जीवन में काम कर रही महिला अधिकारियों के लिए यह पोस्ट अत्यंत पीड़ादायक है, क्योंकि इसे लेकर शहरभर में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
वहीं, इस संबंध में कांग्रेस नेता राजेश टंडन का कहना है कि ' मैंने किसी भी महिला अधिकारी के संबंध में काेई टिप्पणी नहीं की है, न ही काेई वीडियाे क्लिपिंग पाेस्ट की है। मैंने यह जरूर कहा है कि इस तरह की क्लिपिंग हाेने की अफवाह है, इसलिए उसे काेई भी शेयर या पाेस्ट नहीं करें। वकील हाेने के नाते यह मेरा दायित्व था कि मैं लाेगाें काे सजग करूं।
चार फरवरी से मामला सुर्खियों में है। आज तक भी राज्य की कांग्रेस सरकार ने, कांग्रेस के इस नेता और पूर्व सरकारी वकील को लेकर कोई अफसोस जाहिर नहीं किया और ऐसी टिप्पणी करने पर उन पर संगठन की ओर से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर भी कानूनन उस पर शिकंजा कसता नजर नहीं आ रहा। क्योंकि सरकार महिला सुरक्षा का यहां बस दावा करती नजर आ रही है। यहां राह चलती लड़कियों पर फब्ती कसते लोग तो मिल ही जाएंगे, बल्कि सशक्त महिलाएं, बड़े पदों पर आसीन महिलाओं पर भी अभद्र टिप्पणी करने वाले कम नहीं है। या यों कहें कि कानून को लेकर लोगों में डर नहीं है।
राज्य सरकार की चुप्पी देखते हुए शुक्रवार को भाजपा विधायक अनिता भदेल ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन में कहा कि, अजमेर में चार महिला आईएएस अधिकारियों के खिलाफ एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट की है। मामले में एफआईआर दर्ज करवाई। पर नेता ने हाइकोर्ट में जाकर गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया। सरकार को स्टे हटवाकर उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। भदेल ने कहा कि ये महिलाओं की गरिमा का मामला है।

इसी बीच खबर है कि 24 फरवरी को अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गुजरात के अहमदाबाद दौरे पर रहेंगे। खामियों को ठीक करने की बजाय उन्हें छिपाने का काम हो रहा है। अहमदाबाद की झुग्गियों को छिपाने के लिए उनके आगे 7—7 फुट उंची दीवार बनाने का काम यहां युद्ध स्तर पर जारी है।
यों तो बहुत सी समस्याएं हैं देश में जिन पर केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को युद्ध स्तर पर काम करने की जरूरत है। और महिला सुरक्षा की तो खासकर। क्योंकि यहां आरोपियों को कानून के सहारे की दीवार खड़ी कर छिपाने से काम नहीं चलेगा। कानून महिलाओं की सुरक्षा के लिए हैं, तो उन्हें सुरक्षा देना हर सरकार को तय करना ही होगा। और ये वादों, दावों की नहीं से नहीं होगा, इसके लिए सरकारों को प्रतिबद्धता दिखानी ही होगी। सार्वजनिक तौर पर यों महिलाओं का चारित्रिक हनन होता रहेगा, तो हम कहेंगे कि समर अभी शेष है।

Tasneem Khan Desk
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