मंच पर 'अकबरी लौटा' और 'प्रेतात्मा बिकाऊ है'


रोहित और चिंत्राश के अभिनय ने जीता दर्शकों का दिल
'रंग बताशे. 3 सोलो फेस्टिवल' का दूसरा दिन

By: Rakhi Hajela

Published: 17 Sep 2021, 08:16 PM IST


जयपुर

रविन्द्र मंच के स्टूडियो थियेटर में 'रंग बताशे. 3 सोलो फेस्टिवल' में शुक्रवार को दो सोलो प्रस्तुतियां प्रस्तुत की गईं। पहली प्रस्तुति थी 'अकबरी लौटा'। अन्नपूर्णानंद वर्मा की लिखी इस कहानी में बताया गया कि कैसे एक दोस्त अपने दूसरे दोस्त की मदद करने के लिए एक साधारण लौटे को अकबर बादशाह का लौटा बता देता है और एक अंग्रेज को वो लौटा 500 रुपए में बेच देता है। नाटक में एकल अभिनय रोहित बाजिया ने किया जिनकी बोलने की स्टाइल ने दर्शकों को बीच बीच में गुदगुदाया। दूसरी प्रस्तुति थी 'प्रेतात्मा बिकाऊ है'। गौरीशंकर राजहंस की लिखी इस कहानी में बताया गया कि सत्ता में बड़े पद पर बैठे व्यक्ति साधारण युवक को कैसे अपने फायदे के लिए काम मे लेते हैं और फिर काम निकल जाने पर उसे बली का बकरा बना देते हैं। एक जीता जागता इंसान उनके लिए प्रेत की तरह बन जाता है जो किसी भी तरह कैसे भी बिकने को तैयार है। इस प्रस्तुति को चित्रांश माथुर ने अपने सधे अभिनय से जीवंत बना दिया। दोनों नाटकों का निर्देशन दीपक गुप्ता और तपन भट्ट ने किया। नाटक में रूप सज्जा रवि बांका की थी। सेट और लाइट दीपक गुप्ता की रही। नाटक सोशियल अवेयरनैस वॉइस ऑफ ईच सोसाइटी संस्था की ओर से प्रस्तुत किए गए। शनिवार को समारोह के अंतिम दिन नाटक 'शतरंज के खिलाड़ी' और 'मैं मुसलमान हूं' प्रस्तुत किए जाएंगे।

Rakhi Hajela Desk
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